भोपाल में आयोजित ‘कर्मयोगी बनें’ सर्वोच्च परामर्शदायी समिति की कार्यशाला में शिक्षा को रोजगारोन्मुख और अनुभव आधारित बनाने पर व्यापक चर्चा की गई। कार्यक्रम में शिक्षा को जीवन के व्यावहारिक अनुभवों से जोड़ने और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य पर विचार साझा किए गए। कार्यशाला के दौरान वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा प्रणाली को केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित रखने के बजाय उसे कौशल, उद्योग आवश्यकताओं और वास्तविक कार्यक्षेत्र से जोड़ना आवश्यक है। नई शिक्षा नीति-2020 के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए पाठ्यक्रम और उद्योगों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर बल दिया गया। प्रतिभागियों ने इस बात पर चर्चा की कि शैक्षणिक संस्थानों और उद्योग जगत के बीच सहयोग से युवाओं को रोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं। कार्यशाला में कौशल विकास, इंटर्नशिप, व्यावसायिक प्रशिक्षण और नवाचार आधारित शिक्षा मॉडल जैसे विषयों पर भी विचार-विमर्श हुआ। वक्ताओं ने कहा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में युवाओं को प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए पाठ्यक्रमों का समय-समय पर अद्यतन होना आवश्यक है। नई शिक्षा नीति-2020 के तहत बहु-विषयक शिक्षा, लचीले पाठ्यक्रम और कौशल आधारित अधिगम को प्राथमिकता दी गई है, जिसका उद्देश्य छात्रों को आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनाना है। कार्यशाला में इस दिशा में आगे की रणनीति और संस्थागत समन्वय को मजबूत करने के उपायों पर भी चर्चा की गई। प्रतिभागियों ने कहा कि शिक्षा और उद्योग के बीच सहयोग से स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक विकास को भी गति मिल सकती है। कार्यक्रम में विभिन्न शिक्षाविदों, विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं ने भाग लिया और अनुभव आधारित शिक्षा मॉडल को लागू करने की आवश्यकता पर सहमति जताई। आयोजन का उद्देश्य युवाओं को रोजगारोन्मुख शिक्षा प्रदान करने और दीर्घकालिक विकास के लिए ठोस ढांचा तैयार करने पर केंद्रित रहा।
by Dainikshamtak on | 2026-02-19 13:25:25