1997 में पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले धर्मेंद्र प्रधान, अब NEET विवाद में इस्तीफे की मांग के केंद्र में

1997 में पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले धर्मेंद्र प्रधान, अब NEET विवाद में इस्तीफे की मांग के केंद्र में

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को लेकर एक पुरानी राजनीतिक घटना फिर चर्चा में आ गई है। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों और सार्वजनिक रूप से साझा की गई जानकारी के अनुसार, वर्ष 1997 में जब वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के राष्ट्रीय सचिव थे, तब उन्होंने ओडिशा सचिवालय के सामने कथित पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन किया था। अब, प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मौजूदा विवाद और NEET पेपर लीक के मुद्दे के बीच विपक्षी दल और कुछ छात्र संगठन उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

 विपक्ष का कहना है कि जिस मुद्दे पर धर्मेंद्र प्रधान ने छात्र नेता के रूप में आंदोलन किया था, उसी प्रकार के आरोपों के बीच अब उन्हें केंद्रीय शिक्षा मंत्री के रूप में नैतिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए। इसी आधार पर कई राजनीतिक दलों और संगठनों ने उनके इस्तीफे की मांग दोहराई है। दूसरी ओर, केंद्र सरकार का कहना है कि NEET से जुड़े मामलों में जांच एजेंसियां कार्रवाई कर रही हैं और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है। सरकार ने यह भी कहा है कि परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए कई सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं।

 हाल के दिनों में संसद के भीतर और बाहर NEET परीक्षा तथा कथित पेपर लीक को लेकर राजनीतिक बहस तेज रही है। विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग कर रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि वह चर्चा के लिए तैयार है और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना सरकार और परीक्षा संचालित करने वाली एजेंसियों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। साथ ही, किसी भी मामले में जवाबदेही और कानूनी कार्रवाई तथ्यों एवं जांच के आधार पर तय होती है। फिलहाल धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग और सरकार के रुख को लेकर राजनीतिक गतिविधियां लगातार जारी हैं तथा आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद और सार्वजनिक विमर्श का प्रमुख विषय बना रह सकता है।

by Dainikshamtak on | 2026-07-23 16:07:27

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