वित्त वर्ष 2027 तक ISM के तहत 31,299 करोड़ रुपये निवेश का अनुमान

वित्त वर्ष 2027 तक ISM के तहत 31,299 करोड़ रुपये निवेश का अनुमान

भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र में निवेश की रफ्तार तेज होती दिखाई दे रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अनुमानों के अनुसार, इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) के तहत प्रोत्साहन प्राप्त करने वाली कंपनियां वित्त वर्ष 2027 तक कुल 31,299 करोड़ रुपये का निवेश करेंगी। यह राशि इस योजना के अंतर्गत घोषित लगभग 1.65 लाख करोड़ रुपये के कुल प्रतिबद्ध निवेश का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है।

रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 तक पांच प्रमुख सेमीकंडक्टर कंपनियों द्वारा लगभग 15,799 करोड़ रुपये का निवेश किया जा चुका है। मंत्रालय का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 के दौरान इसमें लगभग 15,500 करोड़ रुपये की अतिरिक्त वृद्धि होगी। यह संकेत देता है कि भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण से जुड़ी परियोजनाएं अब तेजी से क्रियान्वयन चरण में प्रवेश कर रही हैं।

इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन को देश में चिप निर्माण, पैकेजिंग, डिजाइन और संबंधित आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने के उद्देश्य से शुरू किया गया था। इस मिशन का लक्ष्य भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और सेमीकंडक्टर उत्पादन का वैश्विक केंद्र बनाना है। सरकार ने इस क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए व्यापक वित्तीय सहायता और नीतिगत समर्थन प्रदान किया है।

इस निवेश अभियान में कई प्रमुख कंपनियां शामिल हैं। इनमें माइक्रोन टेक्नोलॉजी, सीजी पावर, केनेस सेमिकॉन तथा टाटा समूह की सेमीकंडक्टर परियोजनाएं प्रमुख हैं। माइक्रोन ने गुजरात के साणंद में अपनी ATMP (Assembly, Testing, Marking and Packaging) इकाई में निवेश शुरू किया था और वाणिज्यिक उत्पादन भी प्रारंभ कर दिया है। केनेस सेमिकॉन ने भी उत्पादन शुरू कर दिया है, जबकि अन्य परियोजनाएं निर्माण और स्थापना के विभिन्न चरणों में हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, आगामी वर्षों में निवेश का बड़ा हिस्सा अत्याधुनिक मशीनरी और उत्पादन उपकरणों की खरीद पर खर्च होगा। सेमीकंडक्टर विनिर्माण संयंत्रों में उपकरणों की लागत कुल परियोजना लागत का बड़ा भाग होती है। यही कारण है कि परियोजनाओं के तीसरे और चौथे वर्ष में निवेश की मात्रा सामान्यतः अधिक दिखाई देती है।

टाटा समूह की गुजरात के धोलेरा में प्रस्तावित सेमीकंडक्टर फैब परियोजना इस मिशन की सबसे बड़ी पहलों में से एक है। यह परियोजना कुल प्रतिबद्ध निवेश का बड़ा हिस्सा रखती है और भारत की चिप निर्माण क्षमता विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की उम्मीद है। इसके अतिरिक्त असम में टाटा की OSAT परियोजना भी देश के सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने में योगदान देगी।

हाल के महीनों में केंद्र सरकार ने गुजरात सहित विभिन्न राज्यों में नई सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को भी मंजूरी दी है। इन पहलों का उद्देश्य निर्माण, पैकेजिंग, परीक्षण और उन्नत डिस्प्ले तकनीकों में घरेलू क्षमताओं को बढ़ाना है। सरकार का मानना है कि इससे आयात पर निर्भरता कम होगी और उच्च कौशल वाले रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के पुनर्गठन और तकनीकी आत्मनिर्भरता की बढ़ती आवश्यकता के बीच भारत का सेमीकंडक्टर मिशन रणनीतिक महत्व रखता है। यदि घोषित निवेश समय पर क्रियान्वित होते हैं, तो भारत आने वाले वर्षों में वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग में अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

by Dainikshamtak on | 2026-06-13 21:00:28

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