भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) ने देश की सबसे शक्तिशाली परिचालन लॉन्च व्हीकल LVM3 के प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (Technology Transfer) के लिए निजी कंपनियों से रुचि अभिव्यक्ति (EOI) आमंत्रित की है। इस पहल को भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के इतिहास में सबसे बड़े रणनीतिक प्रौद्योगिकी हस्तांतरणों में से एक माना जा रहा है।
LVM3 भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का सबसे भारी परिचालन रॉकेट है और इसे चंद्रयान-2, चंद्रयान-3 तथा भविष्य के गगनयान मिशन जैसे महत्वपूर्ण अभियानों में उपयोग किया गया है। यह रॉकेट निम्न पृथ्वी कक्षा में लगभग 8,000 किलोग्राम तक और भू-समकालिक स्थानांतरण कक्षा में लगभग 4,000 किलोग्राम तक पेलोड पहुंचाने की क्षमता रखता है।
नई व्यवस्था के तहत चयनित भारतीय निजी कंपनी को LVM3 के निर्माण, एकीकरण, परीक्षण, संचालन और व्यावसायिक प्रक्षेपण सेवाओं से संबंधित व्यापक तकनीकी क्षमताएं उपलब्ध कराई जाएंगी। IN-SPACe के अनुसार, इस प्रक्रिया का उद्देश्य निजी उद्योग को पूर्ण लॉन्च वाहन निर्माण और व्यावसायीकरण में सक्षम बनाना है, जिससे भारत के अंतरिक्ष उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ सके।
रिपोर्टों के अनुसार, ISRO चयनित इकाई को अधिकतम 42 महीनों तक या निर्धारित संख्या में सफल लॉन्च पूरे होने तक तकनीकी सहायता और मार्गदर्शन प्रदान करेगा। इससे निजी क्षेत्र को जटिल अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों को अपनाने और स्वतंत्र रूप से संचालन करने में सहायता मिलेगी।
यह कदम ऐसे समय में आया है जब भारत अंतरिक्ष क्षेत्र के उदारीकरण और निजी उद्योग की भागीदारी को लगातार बढ़ावा दे रहा है। हाल ही में PSLV जैसी महत्वपूर्ण लॉन्च प्रणाली के प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और निजी उत्पादन को भी प्रोत्साहित किया गया था। विशेषज्ञों का मानना है कि LVM3 को निजी क्षेत्र के लिए खोलना इस प्रक्रिया का अगला बड़ा चरण है।
विश्लेषकों के अनुसार, निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ने से लॉन्च की आवृत्ति में वृद्धि, लागत दक्षता और वैश्विक व्यावसायिक अवसरों का विस्तार संभव हो सकता है। दुनिया भर में उपग्रह प्रक्षेपण सेवाओं की मांग बढ़ रही है और भारत इस क्षेत्र में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का प्रयास कर रहा है। निजी कंपनियों की सक्रिय भूमिका से भारतीय अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को नई गति मिल सकती है।
इस पहल का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य ISRO को नियमित उत्पादन और व्यावसायिक लॉन्च गतिविधियों से आंशिक रूप से मुक्त करना भी है, ताकि वह गगनयान, उन्नत प्रक्षेपण प्रणालियों, गहरे अंतरिक्ष अभियानों और अनुसंधान एवं विकास पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सके। इससे राष्ट्रीय अंतरिक्ष कार्यक्रम की दीर्घकालिक क्षमताओं को मजबूत करने में सहायता मिल सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि LVM3 के निजीकरण की दिशा में यह कदम भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में संरचनात्मक परिवर्तन का संकेत है। यदि यह मॉडल सफल होता है, तो भविष्य में निजी कंपनियां न केवल उपग्रहों का निर्माण करेंगी बल्कि भारत के सबसे उन्नत प्रक्षेपण वाहनों के उत्पादन और संचालन में भी प्रमुख भूमिका निभा सकती हैं। इसे भारत के अंतरिक्ष उद्योग के विकास में एक नए युग की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
by Dainikshamtak on | 2026-06-13 20:57:21