प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में नियुक्त नीति आयोग के पूर्णकालिक सदस्य डॉ गोबरधन दास से नई दिल्ली में भेंट की। सोशल मीडिया पर पीएम ने कहा कि डॉ दास का व्यक्तिगत जीवन सफर अत्यंत प्रेरणादायक है। हर संघर्ष ने उनके समाज सेवा के संकल्प को और मजबूत किया। सार्वजनिक स्वास्थ्य और इम्यूनोलॉजी में उनके योगदान उल्लेखनीय हैं। दास की विद्वता और कार्यनीति देश की नीति निर्माण प्रक्रिया को समृद्ध करेगी। 25 अप्रैल को नियुक्ति के बाद दास ने 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि यह नियुक्ति बंगाली समुदाय के लिए सम्मान है। दास ने पश्चिम बंगाल दंगों में 17 परिजनों को खोने के बाद भी कठिनाइयों से जूझते हुए सफलता प्राप्त की। गरीब किसान के पुत्र ने स्ट्रीट लाइट के नीचे पढ़ाई की। जेएनयू में प्रोफेसर के रूप में इम्यूनोलॉजी में महत्वपूर्ण शोध किया। बीसीजी वैक्सीन पर कोविड सुरक्षा के उनके सिद्धांत चर्चित रहे। हालांकि दास के शोध कार्य पर पुरानी विवादास्पद खबरें सामने आई हैं। 2021 में द प्रिंट ने उनके 11 शोध पत्रों पर छेड़छाड़ के आरोप लगाए। पबपीयर वेबसाइट पर वैज्ञानिकों ने इमेज मैनिपुलेशन के संकेत दिए। दास ने इसे राजनीतिक साजिश बताया। उन्होंने कहा कि संस्थान निदेशक पद के लिए आवेदन के समय यह हमला हुआ। पत्रकारों के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया। द प्रिंट ने स्वीकार किया कि पबपीयर टिप्पणियां धोखाधड़ी का प्रमाण नहीं। दास ने बीजेपी उम्मीदवार रहते हुए भी शोध जारी रखा। विपक्षी मीडिया ने इसे राजनीतिकरण का हथियार बनाया। नियुक्ति पर बधाई संदेश मिले। दास पूर्वोत्तर और बंगाल के विकास पर ध्यान केंद्रित करेंगे। नीति आयोग में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण होगी। पीएम की सराहना से उनका कद बढ़ा। शोध विवाद पुराना हो चुका। दास सामाजिक न्याय और स्वास्थ्य नीतियों पर कार्य करेंगे। यह नियुक्ति दलित समुदाय के लिए प्रेरणा बनेगी। नीति निर्माण में नई ऊर्जा आएगी।
by Dainikshamtak on | 2026-04-27 14:54:30