भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन गगनयान मानव अंतरिक्ष यात्रा कार्यक्रम के दूसरे बैच में सिविलियन विशेषज्ञों को एस्ट्रोनॉट कोर में शामिल करने की तैयारी कर रहा है। एस्ट्रोनॉट चयन एवं प्रबंधन समिति ने सिफारिश की है कि दूसरे बैच में 10 एस्ट्रोनॉट्स में से 6 सैन्य पायलट और 4 सिविलियन विशेषज्ञ होंगे। विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) क्षेत्रों के ये सिविलियन वैज्ञानिक, डॉक्टर और इंजीनियर होंगे। पहला बैच जिसमें एयर कमोडोर प्रशांत बालकृष्ण नायर, ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला, ग्रुप कैप्टन अजित कृष्णन और ग्रुप कैप्टन अंगद प्रताप शामिल हैं, सभी भारतीय वायुसेना के टेस्ट पायलट हैं। यह पहला बैच गगनयान के प्रारंभिक मानवयुक्त मिशनों के लिए चयनित किया गया था। सिविलियन एस्ट्रोनॉट्स का समावेश इसरो के निरंतर मानव अंतरिक्ष यात्रा कार्यक्रम की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। भविष्य के मिशनों में वैज्ञानिक अनुसंधान, माइक्रोग्रैविटी प्रयोग और अंतरिक्ष स्टेशन परियोजनाओं के लिए विशेषज्ञों की आवश्यकता होगी। समिति ने कुल 40 एस्ट्रोनॉट्स के कोर का प्रस्ताव रखा है। सातवें मानवयुक्त मिशन से चालक दल का आकार 2 से बढ़ाकर 3 किया जा सकता है। तीसरे बैच में संभवतः 10 सिविलियन विशेषज्ञ और केवल 2 मिशन पायलट होंगे। इसरो के पास अभी स्थायी एस्ट्रोनॉट प्रशिक्षण सुविधा नहीं है। वर्तमान में अस्थायी केंद्र पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। गगनयान कार्यक्रम के तहत 2026 में पहला अअमान्ययुक्त मिशन और 2027 में पहला मानवयुक्त मिशन निर्धारित है। अमेरिका, रूस और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में प्रशिक्षण ले रहे भारतीय एस्ट्रोनॉट्स तैयार हो रहे हैं। सिविलियन समावेश से भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा। यह कदम नासा और रूस के कार्यक्रमों के समान है जहां सिविलियन वैज्ञानिक नियमित रूप से अंतरिक्ष जाते हैं। इसरो का यह निर्णय भारत को मानव अंतरिक्ष यात्रा में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है।
by Dainikshamtak on | 2026-04-27 14:52:46