भारतीय सेना ने अपनी वर्दी और औपचारिक परिधान से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए औपनिवेशिक काल से चली आ रही कई परंपराओं को समाप्त करने का निर्णय लिया है। नई यूनिफॉर्म नीति के तहत भारतीय सांस्कृतिक पहचान को अधिक प्रमुखता देने के उद्देश्य से बंदी जैकेट को आधिकारिक परिधान व्यवस्था में शामिल किया गया है। यह कदम सेना के आधुनिकीकरण के साथ-साथ भारतीयकरण की व्यापक प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है। सेना द्वारा जारी नई ड्रेस कोड व्यवस्था में विभिन्न अवसरों के लिए निर्धारित वर्दियों का पुनर्गठन किया गया है ताकि उन्हें वर्तमान आवश्यकताओं और भारतीय सैन्य परंपराओं के अनुरूप बनाया जा सके। नई नीति का उद्देश्य केवल वर्दी में बदलाव करना नहीं है, बल्कि सैन्य संस्थान की पहचान को भारतीय मूल्यों और परंपराओं से अधिक निकटता से जोड़ना भी है। बंदी जैकेट लंबे समय से भारतीय औपचारिक परिधान का हिस्सा रही है और इसे विभिन्न सरकारी तथा राजनयिक आयोजनों में व्यापक रूप से पहना जाता है। सेना द्वारा इसे आधिकारिक ड्रेस कोड में शामिल किए जाने को एक प्रतीकात्मक और व्यावहारिक दोनों प्रकार का कदम माना जा रहा है। इसके साथ ही कई ऐसे परिधान और नियमों की समीक्षा की गई है जिनकी जड़ें ब्रिटिश औपनिवेशिक सैन्य परंपराओं में थीं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय सेना पिछले कुछ वर्षों से सैन्य प्रतीकों, परंपराओं, प्रशिक्षण व्यवस्थाओं और संस्थागत प्रक्रियाओं में भारतीय तत्वों को अधिक महत्व देने की दिशा में कार्य कर रही है। नई वर्दी नीति उसी प्रयास की अगली कड़ी के रूप में देखी जा रही है। सेना का मानना है कि वर्दी केवल पहनावे का विषय नहीं होती, बल्कि यह संगठन की विरासत, पहचान और मूल्यों का भी प्रतिनिधित्व करती है। नई व्यवस्था के माध्यम से भारतीय सैन्य परंपराओं को सम्मान देने के साथ-साथ आधुनिक और व्यावहारिक आवश्यकताओं को भी ध्यान में रखा गया है। इस बदलाव को सेना के भीतर सांस्कृतिक आत्मविश्वास को मजबूत करने तथा संस्थागत पहचान को और अधिक भारतीय स्वरूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में नई ड्रेस कोड व्यवस्था विभिन्न औपचारिक और प्रशासनिक अवसरों पर लागू होती दिखाई देगी।
by Dainikshamtak on | 2026-06-14 15:32:46