भारत की लॉजिस्टिक्स लागत घटकर GDP के 7.97 प्रतिशत पर पहुंची

भारत की लॉजिस्टिक्स लागत घटकर GDP के 7.97 प्रतिशत पर पहुंची

भारत के लॉजिस्टिक्स क्षेत्र ने हाल के वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है और नवीनतम सरकारी आकलन के अनुसार देश की लॉजिस्टिक्स लागत घटकर सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 7.97 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यह आंकड़ा भारत की आपूर्ति श्रृंखला, परिवहन नेटवर्क और बुनियादी ढांचे में हुए सुधारों का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। यह आकलन उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) और नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (NCAER) द्वारा तैयार अध्ययन में सामने आया है।

लॉजिस्टिक्स लागत किसी भी अर्थव्यवस्था की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता का महत्वपूर्ण पैमाना मानी जाती है। इसमें माल के परिवहन, भंडारण, वितरण और आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन से जुड़े खर्च शामिल होते हैं। लंबे समय तक भारत की लॉजिस्टिक्स लागत को 13-14 प्रतिशत या उससे अधिक बताया जाता रहा था, जिससे भारतीय उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता पर असर पड़ने की चर्चा होती थी। हालांकि हालिया अध्ययन ने अधिक व्यापक और डेटा-आधारित मूल्यांकन प्रस्तुत किया है।

रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2023-24 के लिए भारत की कुल लॉजिस्टिक्स लागत GDP के 7.97 प्रतिशत के बराबर आंकी गई है। अध्ययन में विभिन्न परिवहन माध्यमों, उद्योग क्षेत्रों और लागत घटकों का विस्तृत विश्लेषण किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्तर विकसित अर्थव्यवस्थाओं के मानकों के काफी करीब है और भारत की आर्थिक दक्षता में सुधार को दर्शाता है।

सरकार का कहना है कि प्रधानमंत्री गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान, राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति, समर्पित माल गलियारे (Dedicated Freight Corridors), राजमार्ग विस्तार, FASTag, ई-वे बिल और डिजिटल ट्रैकिंग जैसी पहलों ने इस बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इन सुधारों का उद्देश्य माल ढुलाई को तेज, पारदर्शी और लागत प्रभावी बनाना रहा है।

रिपोर्ट में रेल परिवहन को सबसे किफायती लॉजिस्टिक्स माध्यमों में से एक बताया गया है। अध्ययन के अनुसार रेल आधारित माल ढुलाई की लागत सड़क परिवहन की तुलना में काफी कम पाई गई। इससे संकेत मिलता है कि मल्टी-मॉडल परिवहन और रेल नेटवर्क के अधिक उपयोग से भविष्य में लॉजिस्टिक्स लागत को और कम किया जा सकता है।

विश्लेषकों का मानना है कि कम लॉजिस्टिक्स लागत का सीधा प्रभाव विनिर्माण, निर्यात और व्यापारिक प्रतिस्पर्धा पर पड़ता है। जब परिवहन और वितरण खर्च कम होते हैं, तो कंपनियों की कुल लागत घटती है और भारतीय उत्पाद वैश्विक बाजारों में अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकते हैं। इससे ‘मेक इन इंडिया’ और निर्यात वृद्धि जैसे राष्ट्रीय लक्ष्यों को भी समर्थन मिल सकता है।

हालांकि विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि आगे की प्रगति के लिए वेयरहाउसिंग, बंदरगाह कनेक्टिविटी, शहरी लॉजिस्टिक्स और अंतिम-मील डिलीवरी जैसे क्षेत्रों में निवेश जारी रखना होगा। छोटे और मध्यम उद्यमों पर लॉजिस्टिक्स लागत का बोझ अभी भी अपेक्षाकृत अधिक माना जाता है, इसलिए दक्षता सुधार की गुंजाइश बनी हुई है।

कुल मिलाकर, भारत की लॉजिस्टिक्स लागत का 7.97 प्रतिशत GDP तक पहुंचना देश के बुनियादी ढांचे और आपूर्ति श्रृंखला सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। नीति निर्माताओं और उद्योग जगत को उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में यह सुधार भारत को वैश्विक विनिर्माण और व्यापार केंद्र के रूप में और मजबूत बनाने में मदद करेगा।

by Dainikshamtak on | 2026-06-14 19:48:55

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