सुप्रीम कोर्ट ने प्रशांत किशोर की बिहार चुनाव याचिका खारिज की, CJI सूर्यकांत: "लोगों ने ठुकराया तो न्यायिक मंच से लोकप्रियता?"

सुप्रीम कोर्ट ने प्रशांत किशोर की बिहार चुनाव याचिका खारिज की, CJI सूर्यकांत:

सुप्रीम कोर्ट ने प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी की याचिका खारिज कर दी जो 2025 बिहार विधानसभा चुनाव परिणामों को रद्द कर नए सिरे से चुनाव कराने की मांग कर रही थी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस ज्योमल्या बाघची की बेंच ने कड़ी टिप्पणी की कि जनता ने खारिज किया तो न्यायिक मंच का दुरुपयोग लोकप्रियता के लिए हो रहा। याचिका वापस लेने की अनुमति दी ताकि पटना हाईकोर्ट जा सकें।
CJI ने वकील सीयू सिंह से पूछा, "आपकी पार्टी को कितने वोट मिले? लोग ठुकराते हैं और आप न्यायिक मंच से प्रसिद्धि पाने आते हैं।" जन सुराज ने 238-242 सीटों पर लड़ीं लेकिन एक भी नहीं जीती। याचिका में मुख्य्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत चुनाव से ठीक पहले 1.5 करोड़ महिलाओं को ₹10,000 प्रत्यक्ष हस्तांतरण को आचार संहिता उल्लंघन बताया। ₹15,600 करोड़ का खर्च, कोई बजटीय प्रावधान नहीं। संविधान के अनुच्छेद 14, 21, 112, 202, 324 का उल्लंघन।
जस्टिस बाघची ने पूछा, "प्रतिनिधित्व ऑफ द पीपल एक्ट की धारा 100 के किस खंड के तहत पूरे राज्य का चुनाव रद्द किया जा सकता है?" बेंच ने कहा कि प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में विशिष्ट आरोप होने चाहिए। सामान्यीकृत याचिका से पूरे चुनाव को रद्द नहीं किया जा सकता। जन सुराज ने तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट ने PM किसान जैसी योजनाओं पर पहले नोटिस जारी किया था। CJI ने स्पष्ट किया कि बिहार योजना अलग है।
यह फैसला चुनावी विवादों में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप पर सीमा तय करता। प्रशांत किशोर को राजनीतिक झटका। बिहार में NDA की जीत को मजबूती। जन सुराज को पटना हाईकोर्ट का रास्ता। फ्रीबीज बहस तेज। सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन याचिकाओं के लिए स्थापित प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित किया। लोकतंत्र में जनादेश सर्वोपरि।

by Dainikshamtak on | 2026-02-08 18:16:08

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