भारत दुनिया का सबसे बड़ा रक्षा सौदा ₹3.25 लाख करोड़ में 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को अंतिम रूप देने जा रहा है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के फरवरी 2026 दौरे से पहले कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) से मंजूरी मिलने की संभावना है। डसॉल्ट एविएशन के साथ सरकारी खरीद (G2G) समझौता होगा। 36 पहले से IAF में हैं, नौसेना के 26 राफेल-M के बाद कुल 176 हो जाएेंगे। यह IAF को चीन-पाकिस्तान खतरों से निपटने में मजबूत बनाएगा।
सौदे का विवरण:
18 विमान: फ्लाई-अवे कंडीशन में तत्काल उपलब्ध
96 विमान: नागपुर में रिलायंस एयरोस्पेस के साथ असेंबली (30% स्वदेशी सामग्री)
F4 स्टैंडर्ड: उन्नत रडार, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर, सैटेलाइट कनेक्टिविटी
कीमत: प्रति विमान ₹2,850 करोड़ (2016 के ₹1,635 करोड़ से 75% वृद्धि)
मई 2025 के ऑपरेशन सिंदूर में राफेल ने पाकिस्तानी PL-15 मिसाइलों को SPECTRA EW सूट से नाकाम किया। IAF ने युद्ध-परीक्षित राफेल को प्राथमिकता दी। रूस का Su-57 ऑफर ठुकराया क्योंकि 100% स्वदेशी निर्माण के बावजूद लॉजिस्टिक्स जटिल। फ्रांस सोर्स कोड साझा नहीं करेगा, भारतीय हथियार एकीकरण सीमित। आलोचना: आत्मनिर्भर भारत लक्ष्य अधूरा।
रणनीतिक महत्व:
राफेल खरीद से IAF स्क्वाड्रन ताकत 30 से बढ़कर 42 होगी। लद्दाख, LAC तनाव में वायु श्रेष्ठता। नौसेना के INS विक्रांत-विक्रमादित्य के साथ एकीकरण। नागपुर FAL से 10,000+ नौकरियां। स्वदेशी सामग्री चरणबद्ध 60% तक।
मोदी सरकार की सबसे बड़ी रक्षा खरीद। फ्रांस के साथ रणनीतिक साझेदारी मजबूत। अमेरिका F-35 ऑफर ठुकराया। पाकिस्तान J-10C, चीन J-20 के विरुद्ध प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त। सौदा हस्ताक्षर से पहले CCS अंतिम मंजूरी आवश्यक। रक्षा बजट में प्रावधान। राफेल भारत की वायु शक्ति का प्रतीक बनेगा।
by Dainikshamtak on | 2026-02-08 18:06:10