मोदी सरकार ने चिनाब नदी पर मेगा सावलकोट बांध प्रोजेक्ट शुरू किया, सिंधु जल संधि रोक के बाद J&K को जलविद्युत बूस्ट

मोदी सरकार ने चिनाब नदी पर मेगा सावलकोट बांध प्रोजेक्ट शुरू किया, सिंधु जल संधि रोक के बाद J&K को जलविद्युत बूस्ट

नरेंद्र मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर की चिनाब नदी पर ₹5,129 करोड़ के सावलकोट हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट का कार्य शुरू कर दिया। न्यूज़18 के अनुसार यह भारत-पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि को रोकने के बाद पहला बड़ा नया जलविद्युत प्रोजेक्ट है। NHPC ने 5 फरवरी को कंपनियों से बोली आमंत्रित की। उधमपुर और रामबन जिले में स्थित यह 1,856 MW (चरण-1: 1,406 MW, चरण-2: 450 MW) का 'रन ऑफ रिवर' प्रोजेक्ट बगलिहार (ऊपरी) और सलाल (निचले) प्रोजेक्ट के बीच बनेगा। पर्यावरण मंत्रालय ने अक्टूबर 2025 में मंजूरी दी थी।
सिंधु जल संधि (1960) के तहत भारत को चिनाब जैसी पश्चिमी नदियों पर केवल 'नॉन-कंजम्प्टिव' उपयोग (बिजली उत्पादन) की अनुमति थी। संधि रोकने के बाद भारत अपनी जल संसाधनों पर पूर्ण नियंत्रण ले रहा। सावलकोट के साथ चार अन्य चिनाब बेसिन प्रोजेक्ट तेजी से आगे बढ़ रहे:

  • पाकल दुल (1000 MW): चिनाब पर भारत का पहला स्टोरेज बांध, दिसंबर 2026 तक कमीशन

  • कиру (624 MW): 135 मीटर ऊंचा, दिसंबर 2026 लक्ष्य

  • क्वार (540 MW): 109 मीटर बांध, मार्च 2028 तक

  • राटले (850 MW): सबसे विवादित, 2028 लक्ष्य
    इनसे कुल 4,000+ MW बिजली बनेगी। ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर के हालिया निरीक्षण के बाद समयसीमा तय।
    पाकिस्तान ने इन प्रोजेक्ट्स का विरोध किया था क्योंकि ये उसके कृषि और जल आपूर्ति को प्रभावित कर सकते। चिनाब पर नियंत्रण से भारत को जल प्रवाह समयबद्ध करने की क्षमता मिलेगी। J&K में बुनियादी ढांचा मजबूत होगा, हजारों नौकरियां सृजित। रक्षा, बाढ़ नियंत्रण और ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा। मोदी सरकार का जल-भू-राजनीतिक रुख। पाकिस्तान पर जल दबाव बढ़ेगा। 

by Dainikshamtak on | 2026-02-08 18:08:11

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