वैसे बेमिसाल शब्द प्रत्येक क्षण, प्रत्येक दिन के लिए होना चाहिए, परंतु प्रतिवर्ष को अपनी उपलब्धि, संघर्ष, हार-जीत, अनुभवों से बेमिसाल बनाया जाता है और वर्ष के बाद दशकों में पहुंचते हैं, तो बेमिसाल शब्द एक सुखद अहसास देता है।
शाम तक समाचार पत्र अपने दो दशकों यानी 20 वर्षों के सफर को एक टैगलाइन बेमिसाल 20 साल के द्वारा प्रदर्शित कर रहा है। 20 वर्ष में शाम तक समाचार पत्र ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। उतार में ब्रेक का तो चढ़ाव में एक्सीलेटर का पूरा ध्यान रखा गया है। 1998 में वंडर टाइम्स साप्ताहिक अखबार के बाद मासिक वंडर टाइम्स का भी प्रकाशन किया गया। वर्ष 2003-04 में राजधानी भोपाल सहित प्रदेश में सांध्य अखबारों में खालीपन (वैक्यूम) देखा जा रहा था। मुश्किल से दो या तीन अखबार प्रकाशित होते थे। तब सांध्य अखबार के प्रकाशन का विचार आया और 23 जून 2005 को सांध्य दैनिक शाम तक के प्रकाशन की शुरुआत की गई। शाम तक समाचार पत्र को सदैव व्यक्तियों से ऊपर रखा यानी संपादक- प्रकाशक होने के नाते कार्यालय सहायकों सहित सभी को हमेशा व्यक्ति नहीं संस्थान से जुड़ने के लिए कहा गया क्योंकि व्यक्ति से बड़ा संस्थान होता है और संस्थाओं से देश और उसकी भावनाएं जुड़ी रहती हैं। व्यक्ति का अंत है परंतु संस्थान की यात्रा अनवरत रहती है। एक संस्थान में दो दशक होने पर एक मुहावरा याद आता है... वर्षों का संघर्ष एक दिन बहुत खूबसूरत तरीके से खुद से टकराता है। 20 वर्षों की यात्रा में वरिष्ठ पत्रकार स्वर्गीय विश्वेश्वर शर्मा (प्रथम संपादक) सहित पत्रकारों, सहायकों, मित्रों, परिवारजनों, पाठकों ने परोक्ष-अपरोक्ष रूप से सहयोग दिया है जिसके लिए शाम तक समाचार पत्र उनका आभारी है।
by Dainikshamtak on | 2025-06-24 16:14:12 Last Updated by Dainikshamtak on2026-05-13 16:55:56