ब्रह्मपुत्र पर चीन का महा डैम: जल संकट की तरफ बढ़ता भारत?

ब्रह्मपुत्र पर चीन का महा डैम: जल संकट की तरफ बढ़ता भारत?

एशिया की जीवनरेखा मानी जाने वाली ब्रह्मपुत्र नदी आज एक नए भू-राजनीतिक संकट का केंद्र बन गई है। तिब्बत में स्थित मेडोग इलाके में चीन दुनिया का सबसे बड़ा जलविद्युत परियोजना—Medog Hydropower Station—बना रहा है। इसकी क्षमता चीन के ही Three Gorges Dam से तीन गुना अधिक बताई जा रही है। चीन का दावा है कि यह प्रोजेक्ट क्लीन एनर्जी और तिब्बत के विकास का मॉडल बनेगा, लेकिन भारत और बांग्लादेश जैसे डाउनस्ट्रीम देशों के लिए यह गंभीर चिंताओं का कारण बन गया है।

अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने इसे ‘टिकिंग वाटर बम’ कहा है, जबकि असम के सीएम हिमंता बिस्वा सरमा का मानना है कि नियंत्रित जल प्रवाह से बाढ़ का प्रभाव कम हो सकता है। लेकिन चिंता इस बात की है कि यह डैम एक भूकंप संभावित क्षेत्र में बन रहा है, जहां भूस्खलन और जलस्रोतों के अचानक टूटने की आशंका बनी रहती है।

भारत ने भी प्रतिक्रिया स्वरूप अरुणाचल के अपर सियांग में एक मेगा डैम प्रोजेक्ट की योजना बनाई है। लेकिन सबसे बड़ा संकट है कि भारत और चीन के बीच कोई विधिक जल-बंटवारा समझौता नहीं है। 2022 से चीन ने ब्रह्मपुत्र पर हाइड्रोलॉजिकल डेटा भी साझा करना बंद कर दिया है, जो मानसून पूर्वानुमान और आपदा प्रबंधन के लिए बेहद आवश्यक था।

यह सवाल अब और गंभीर हो गया है: क्या ब्रह्मपुत्र नदी, सहयोग का रास्ता बनेगी या संघर्ष का? जब पर्यावरणीय जोखिम और रणनीतिक भय एक साथ बढ़ रहे हों, तब 'क्लीन एनर्जी' के नाम पर यह दौड़ आखिर किस कीमत पर जारी रहेगी?

by Dainikshamtak on | 2025-07-24 16:02:54

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