केंद्र सरकार ने सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और संगठित परीक्षा धोखाधड़ी पर प्रभावी रोक लगाने के उद्देश्य से लोकसभा में एक नया विधेयक पेश किया है। यह विधेयक विपक्ष के विरोध और सदन में हुए हंगामे के बीच प्रस्तुत किया गया। सरकार का कहना है कि प्रस्तावित कानून का उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं की पारदर्शिता, विश्वसनीयता और निष्पक्षता को मजबूत करना है, ताकि लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य की रक्षा की जा सके। हाल के वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं के मामलों ने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं। इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने अधिक कठोर कानूनी प्रावधानों वाला यह विधेयक संसद में पेश किया है। प्रस्तावित विधेयक में संगठित परीक्षा धोखाधड़ी, पेपर लीक, तकनीकी माध्यमों से की जाने वाली अनियमितताओं और ऐसे अपराधों में शामिल नेटवर्क के विरुद्ध सख्त कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। सरकार का कहना है कि दोषियों के लिए कठोर कारावास, आर्थिक दंड, त्वरित जांच और मामलों के शीघ्र निपटारे की व्यवस्था से परीक्षा प्रणाली में जनता और अभ्यर्थियों का विश्वास मजबूत होगा। इसके साथ ही परीक्षा संचालन संस्थाओं की जवाबदेही बढ़ाने, डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने और आधुनिक तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया है। दूसरी ओर विपक्ष ने विधेयक को लेकर विभिन्न आपत्तियां दर्ज कराते हुए सरकार से परीक्षा प्रणाली में व्यापक प्रशासनिक सुधारों और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की। विपक्ष का कहना है कि केवल कानून को सख्त बनाने के साथ-साथ परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं की कार्यप्रणाली में भी सुधार आवश्यक है। संसद में विधेयक पर विस्तृत चर्चा के दौरान विभिन्न राजनीतिक दल अपने सुझाव और संशोधन प्रस्तुत कर सकते हैं। यदि यह विधेयक संसद के दोनों सदनों से पारित होकर कानून बनता है, तो सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, सुरक्षा और जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में इसे एक महत्वपूर्ण कदम माना जाएगा। सरकार का कहना है कि उसका उद्देश्य योग्य अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा करना और देश की परीक्षा व्यवस्था को अधिक विश्वसनीय तथा निष्पक्ष बनाना है।
by Dainikshamtak on | 2026-07-28 14:10:23