तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने विधानसभा और लोकसभा चुनाव लड़ने की न्यूनतम आयु सीमा कम करने का समर्थन करते हुए कहा है कि यदि 21 वर्ष का एक युवा भारतीय प्रशासनिक सेवा का अधिकारी बन सकता है और स्थानीय निकाय चुनाव लड़ सकता है, तो उसे विधानसभा और संसद का चुनाव लड़ने का अवसर भी मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने और लोकतांत्रिक संस्थाओं में नई पीढ़ी को अधिक प्रतिनिधित्व देने के लिए इस विषय पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। वर्तमान में भारत के संविधान और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत लोकसभा तथा राज्य विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम आयु 25 वर्ष निर्धारित है, जबकि पंचायत और नगर निकायों के चुनावों में कई राज्यों में 21 वर्ष की आयु से चुनाव लड़ने की अनुमति है। मुख्यमंत्री का कहना है कि आज के युवा शिक्षा, प्रशासन, प्रौद्योगिकी और उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में कम उम्र में ही उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर रहे हैं, इसलिए उन्हें विधायिका में प्रतिनिधित्व का अवसर देने पर भी विचार होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं की ऊर्जा, नए विचार और आधुनिक दृष्टिकोण लोकतांत्रिक व्यवस्था को और अधिक सशक्त बना सकते हैं। हालांकि इस विषय पर संवैधानिक संशोधन और व्यापक राजनीतिक सहमति आवश्यक होगी क्योंकि लोकसभा और विधानसभा चुनावों की पात्रता संविधान में निर्धारित है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव लड़ने की न्यूनतम आयु घटाने के पक्ष और विपक्ष दोनों में तर्क मौजूद हैं। समर्थकों का कहना है कि इससे युवाओं की भागीदारी बढ़ेगी और लोकतंत्र अधिक प्रतिनिधिक बनेगा, जबकि कुछ विशेषज्ञों का मत है कि विधायी जिम्मेदारियों के लिए पर्याप्त अनुभव और परिपक्वता भी महत्वपूर्ण पहलू हैं। फिलहाल मुख्यमंत्री का यह बयान राजनीतिक और संवैधानिक बहस का विषय बन गया है। यदि भविष्य में इस दिशा में कोई औपचारिक प्रस्ताव आता है, तो संसद, राज्यों और विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच व्यापक चर्चा के बाद ही किसी संभावित बदलाव पर निर्णय लिया जा सकेगा।
by Dainikshamtak on | 2026-07-28 14:06:41