कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भारत की विदेश नीति और वैश्विक रणनीतिक स्थिति पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि देश को न तो चीन के सामने झुकना चाहिए और न ही अमेरिका पर पूरी तरह निर्भर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत को अपनी स्वतंत्र और संतुलित विदेश नीति को बनाए रखते हुए राष्ट्रीय हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए। उनके अनुसार भारत की वैश्विक भूमिका लगातार मजबूत हो रही है और ऐसे समय में देश को किसी एक महाशक्ति पर अत्यधिक निर्भर होने के बजाय बहुपक्षीय सहयोग, रणनीतिक स्वायत्तता और संतुलित कूटनीति की नीति पर आगे बढ़ना चाहिए। शशि थरूर ने कहा कि भारत के चीन और अमेरिका दोनों के साथ महत्वपूर्ण आर्थिक, सामरिक और कूटनीतिक संबंध हैं, लेकिन इन संबंधों का संचालन राष्ट्रीय हितों और दीर्घकालिक रणनीतिक उद्देश्यों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक शक्ति संतुलन तेजी से बदल रहा है और भारत को अपनी बढ़ती आर्थिक तथा सामरिक क्षमता के अनुरूप स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता बनाए रखनी चाहिए। भारत लंबे समय से रणनीतिक स्वायत्तता की नीति का समर्थन करता रहा है और विभिन्न वैश्विक मंचों पर स्वतंत्र दृष्टिकोण अपनाता रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में भारत के लिए अमेरिका, यूरोप, रूस, जापान, आसियान देशों और अन्य साझेदारों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखना उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना अपने राष्ट्रीय सुरक्षा हितों की रक्षा करना। चीन के साथ सीमा विवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों के कारण दोनों देशों के संबंधों में चुनौतियां बनी हुई हैं, जबकि अमेरिका के साथ रक्षा, प्रौद्योगिकी, व्यापार और निवेश के क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ा है। विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की रणनीतिक स्वायत्तता उसकी सबसे बड़ी कूटनीतिक ताकतों में से एक रही है। शशि थरूर का यह बयान इसी व्यापक विदेश नीति विमर्श का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें भारत के दीर्घकालिक राष्ट्रीय हितों, वैश्विक साझेदारियों और स्वतंत्र निर्णय क्षमता पर विशेष बल दिया गया है।
by Dainikshamtak on | 2026-07-28 13:49:23