मई का महीना अभी ठीक से शुरू भी नहीं हुआ है और भारत के कई हिस्सों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार और ओडिशा जैसे राज्यों में लगातार हीटवेव की स्थिति बनी हुई है। भारतीय मौसम विभाग यानी IMD ने कई राज्यों के लिए हीटवेव अलर्ट जारी किया है। यह केवल एक सामान्य गर्मी का मौसम नहीं लग रहा, बल्कि एक ऐसा संकट बनता जा रहा है जिसका असर लोगों की सेहत, बिजली व्यवस्था, कामकाज और रोजमर्रा की जिंदगी पर साफ दिखाई देने लगा है।दिल्ली में इस सीजन का अब तक का सबसे अधिक तापमान 42.8 डिग्री रिकॉर्ड किया गया, जो सामान्य तापमान से लगभग 5 डिग्री ज्यादा था। राजस्थान के श्रीगंगानगर में तापमान 44.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। कई शहरों में दोपहर के समय सड़कों पर लोगों की आवाजाही कम हो रही है क्योंकि तेज धूप और गर्म हवाएं सीधे शरीर पर असर डाल रही हैं। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस साल गर्मी सामान्य से पहले और ज्यादा तीव्र रूप में देखने को मिल रही है।लेकिन समस्या केवल तापमान बढ़ने तक सीमित नहीं है। इस भीषण गर्मी का सीधा असर देश की बिजली व्यवस्था पर भी पड़ रहा है। एयर कंडीशनर, कूलर और पंखों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ने के कारण देश की बिजली मांग रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार भारत की पावर डिमांड 256 गीगावॉट तक पहुंच चुकी है, जो अब तक के सबसे ऊंचे स्तरों में से एक है। इसके कारण कई जगहों पर बिजली व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है और स्थानीय स्तर पर ब्लैकआउट जैसी समस्याएं भी सामने आ रही हैं।भारत जैसे देश में जहां पहले ही कई क्षेत्रों में बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर सीमित है, वहां लगातार बढ़ती गर्मी आने वाले समय में और बड़ी चुनौती बन सकती है। ग्रामीण इलाकों में स्थिति और भी कठिन हो जाती है क्योंकि वहां बिजली कटौती का असर सीधे लोगों के स्वास्थ्य और कामकाज पर पड़ता है। खेती, निर्माण कार्य और मजदूरी जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों के लिए दोपहर की गर्मी जानलेवा साबित हो सकती है।डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार इस समय सबसे ज्यादा खतरा हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन का है। लगातार तेज गर्मी में रहने से शरीर का तापमान तेजी से बढ़ने लगता है। शुरुआत में हीट क्रैम्प्स, कमजोरी, चक्कर आना और बेहोशी जैसी समस्याएं सामने आती हैं। लेकिन यदि समय रहते सावधानी न बरती जाए तो शरीर का तापमान 104 डिग्री फारेनहाइट तक पहुंच सकता है, जिसे हीट स्ट्रोक कहा जाता है। यह स्थिति जानलेवा हो सकती है और गंभीर मामलों में व्यक्ति कोमा तक में जा सकता है।डॉक्टरों की सलाह है कि जरूरत न हो तो दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच बाहर निकलने से बचना चाहिए। शरीर को लगातार हाइड्रेट रखना बेहद जरूरी है। ज्यादा पानी पीना, ORS, नींबू पानी, छाछ और नारियल पानी जैसे घरेलू उपाय शरीर को गर्मी से बचाने में मदद करते हैं। हल्के और ढीले कपड़े पहनना तथा सीधे धूप में ज्यादा देर तक न रहना भी जरूरी माना जा रहा है।गर्मी की यह समस्या अब केवल रेगिस्तानी या पारंपरिक गर्म इलाकों तक सीमित नहीं रही। भोपाल जैसे शहरों में भी “अर्बन हीट आइलैंड इफेक्ट” साफ दिखाई देने लगा है। इसका मतलब है कि शहरों का तापमान आसपास के ग्रामीण इलाकों की तुलना में ज्यादा महसूस होने लगा है। विशेषज्ञों का कहना है कि तेजी से बढ़ता कंक्रीट निर्माण, कम होते पेड़-पौधे, घटते ग्रीन एरिया और लगातार खराब होती एयर क्वालिटी इस समस्या को और गंभीर बना रहे हैं।भोपाल, जो कभी अपनी झीलों और हरियाली के लिए जाना जाता था, वहां भी अब गर्मी पहले की तुलना में ज्यादा महसूस की जा रही है। शहर में तेजी से बढ़ती इमारतें, चौड़ी होती सड़कें और कम होती हरियाली प्राकृतिक ठंडक को कम कर रही हैं। साथ ही वाहनों और औद्योगिक गतिविधियों से बढ़ता प्रदूषण हवा की गुणवत्ता को खराब कर रहा है। यही वजह है कि अब कई लोग महसूस कर रहे हैं कि गर्मी केवल तापमान की वजह से नहीं, बल्कि शहर के बदलते ढांचे की वजह से भी बढ़ रही है।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही स्थिति जारी रही तो आने वाले वर्षों में भारतीय शहरों में रहना और कठिन हो सकता है। तेजी से बढ़ती आबादी और अनियोजित शहरीकरण ने प्राकृतिक संतुलन को कमजोर किया है। पेड़ों की कटाई, झीलों और वेटलैंड्स का कम होना और हर जगह कंक्रीट का फैलाव शहरों को प्राकृतिक रूप से ठंडा होने से रोक रहा है।इसके अलावा वैश्विक स्तर पर हो रहे जलवायु परिवर्तन का असर भी भारत में साफ दिखाई दे रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इंसानी गतिविधियों के कारण बढ़ रही ग्लोबल वार्मिंग की वजह से हीटवेव अब ज्यादा लंबे समय तक और ज्यादा तीव्र रूप में देखने को मिल रही है। पहले जहां मई और जून में गर्मी अपने चरम पर पहुंचती थी, वहीं अब अप्रैल से ही तापमान असामान्य स्तर तक पहुंचने लगा है।इसका आर्थिक असर भी कम नहीं है। निर्माण, खेती और दिहाड़ी मजदूरी जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। अत्यधिक गर्मी में लंबे समय तक काम करना मुश्किल हो जाता है, जिससे काम के घंटे कम होते हैं और आमदनी पर असर पड़ता है। कई अध्ययनों में यह चेतावनी दी गई है कि यदि हीटवेव की स्थिति लगातार बढ़ती रही तो भारत की उत्पादकता और अर्थव्यवस्था पर भी बड़ा असर पड़ सकता है।सरल शब्दों में समझें तो भारत में अब गर्मी सिर्फ एक मौसम नहीं रह गई है। यह धीरे-धीरे स्वास्थ्य, बिजली, रोजगार, पर्यावरण और शहरों की रहने योग्य स्थिति से जुड़ा बड़ा संकट बनती जा रही है। आने वाले समय में इससे निपटने के लिए केवल मौसम विभाग की चेतावनियां काफी नहीं होंगी। शहरों की प्लानिंग, हरियाली बढ़ाने, प्रदूषण कम करने और लोगों में जागरूकता फैलाने जैसे बड़े कदम उठाने होंगे। क्योंकि अगर हालात ऐसे ही बढ़ते रहे, तो आने वाले वर्षों में हीटवेव भारत के सबसे गंभीर शहरी और पर्यावरणीय संकटों में से एक बन सकती है।
by Dainikshamtak on | 2026-05-22 17:37:41