‘One Nation, One Election’ यानी देशभर में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने के प्रस्ताव को लेकर संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की रिपोर्ट में बड़ा दावा किया गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार समिति का कहना है कि यदि देश में एक साथ चुनाव कराए जाते हैं तो लगभग ₹7 लाख करोड़ तक की बचत संभव हो सकती है। साथ ही इससे सरकारी कार्यक्षमता बेहतर होने और GDP वृद्धि दर में 1.6 प्रतिशत तक अतिरिक्त बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि “वन नेशन, वन इलेक्शन” लंबे समय से भारत की राजनीतिक और संवैधानिक बहस का प्रमुख विषय बना हुआ है। समर्थकों का तर्क है कि बार-बार चुनाव होने से सरकारी संसाधनों, प्रशासनिक मशीनरी और वित्तीय खर्च पर भारी दबाव पड़ता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक JPC ने कहा है कि लगातार चुनावी प्रक्रिया के कारण नीतिगत फैसलों और विकास परियोजनाओं पर भी प्रभाव पड़ता है, क्योंकि चुनाव आचार संहिता बार-बार लागू होती रहती है। आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि चुनाव एक साथ कराए जाएं तो सुरक्षा, प्रशासन, चुनावी प्रबंधन और राजनीतिक खर्च में बड़ी कमी आ सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार इससे सरकारों को लंबी अवधि की नीतियों और प्रशासनिक कार्यों पर अधिक ध्यान केंद्रित करने का अवसर मिल सकता है। हालांकि विपक्षी दलों और कुछ संवैधानिक विशेषज्ञों ने इस प्रस्ताव को लेकर कई सवाल भी उठाए हैं। आलोचकों का कहना है कि भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण लोकतंत्र में एक साथ चुनाव कराने के लिए बड़े संवैधानिक और कानूनी बदलावों की आवश्यकता होगी। रिपोर्ट्स के अनुसार क्षेत्रीय दलों को यह भी चिंता है कि एक साथ चुनाव होने से राष्ट्रीय मुद्दे स्थानीय मुद्दों पर हावी हो सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि “वन नेशन, वन इलेक्शन” लागू करने के लिए संसद और राज्यों के बीच व्यापक सहमति आवश्यक होगी। हाल के वर्षों में केंद्र सरकार इस विचार को प्रशासनिक और आर्थिक सुधार के रूप में प्रस्तुत करती रही है। JPC की यह रिपोर्ट अब इस बहस को और तेज कर सकती है कि क्या भारत भविष्य में एकीकृत चुनाव प्रणाली की दिशा में आगे बढ़ेगा।
by Dainikshamtak on | 2026-05-20 16:56:26