भारत के मुख्य न्यायाधीश Surya Kant ने कहा है कि देश की न्यायपालिका को अस्पतालों की तरह 24x7 कार्य करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए ताकि नागरिकों को तेज और प्रभावी न्याय मिल सके। रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने न्यायिक सुधारों, लंबित मामलों और न्याय प्रणाली की कार्यक्षमता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए यह टिप्पणी की। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की अदालतों में करोड़ों मामले लंबित हैं और न्याय मिलने में देरी लंबे समय से गंभीर चिंता का विषय रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक CJI ने संकेत दिया कि आधुनिक तकनीक, डिजिटल कोर्ट प्रणाली और प्रशासनिक सुधारों के माध्यम से न्यायपालिका को अधिक सुलभ और तेज बनाया जा सकता है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि कोविड-19 महामारी के बाद ई-कोर्ट, वर्चुअल सुनवाई और डिजिटल फाइलिंग जैसे बदलावों ने भारतीय न्याय व्यवस्था में बड़ा परिवर्तन लाया है। विश्लेषकों के अनुसार “24x7 न्यायपालिका” की अवधारणा का मतलब जरूरी मामलों की त्वरित सुनवाई, तकनीक आधारित न्याय सेवाओं और बेहतर प्रशासनिक प्रबंधन से हो सकता है। हालांकि कई विशेषज्ञों का कहना है कि इसके लिए अदालतों के बुनियादी ढांचे, न्यायाधीशों की संख्या, तकनीकी संसाधनों और स्टाफ क्षमता में बड़े निवेश की आवश्यकता होगी। रिपोर्ट्स के अनुसार भारत में प्रति लाख आबादी पर न्यायाधीशों की संख्या अभी भी कई विकसित देशों की तुलना में कम है। कानूनी समुदाय में CJI के बयान को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। कुछ विशेषज्ञ इसे न्यायिक सुधारों की दिशा में दूरदर्शी सोच बता रहे हैं, जबकि कुछ का मानना है कि न्यायपालिका पर पहले से मौजूद भारी कार्यभार और मानव संसाधन की चुनौतियों को भी ध्यान में रखना होगा। हाल के वर्षों में केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट दोनों ने न्यायिक डिजिटलीकरण और लंबित मामलों को कम करने के लिए कई पहल शुरू की हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि न्याय प्रणाली अधिक तेज और तकनीक-सक्षम बनती है तो आम नागरिकों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा और मजबूत हो सकता है। CJI सूर्यकांत का यह बयान भारत में न्यायिक सुधारों को लेकर नई बहस का प्रमुख विषय बन गया है।
by Dainikshamtak on | 2026-05-19 12:10:13