NITI Aayog ने भारत में रिसर्च एंड डेवलपमेंट यानी R&D पर निवेश बढ़ाने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा है कि देश को इसे GDP के 2 प्रतिशत तक ले जाना चाहिए। रिपोर्ट्स के अनुसार वर्तमान में भारत अपने सकल घरेलू उत्पाद का केवल लगभग 0.64 प्रतिशत हिस्सा ही R&D पर खर्च करता है, जो कई विकसित और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में काफी कम माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी देश की तकनीकी क्षमता, नवाचार, औद्योगिक प्रतिस्पर्धा और दीर्घकालिक आर्थिक विकास में अनुसंधान और विकास की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक नीति आयोग ने कहा कि यदि भारत को वैश्विक तकनीकी और औद्योगिक शक्ति बनना है तो विज्ञान, नवाचार, उन्नत विनिर्माण, AI, सेमीकंडक्टर, जैव प्रौद्योगिकी और रक्षा अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ाना आवश्यक होगा। आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका, चीन, दक्षिण कोरिया और जापान जैसे देश GDP का बड़ा हिस्सा अनुसंधान एवं विकास पर खर्च करते हैं, जिसके कारण वे तकनीकी नेतृत्व बनाए रखने में सफल रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार भारत में R&D खर्च का बड़ा हिस्सा अभी भी सरकारी संस्थानों से आता है, जबकि निजी क्षेत्र की भागीदारी अपेक्षाकृत कम मानी जाती है। रिपोर्ट्स के अनुसार नीति आयोग ने उद्योग, विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों के बीच बेहतर सहयोग की आवश्यकता पर भी जोर दिया है। हाल के वर्षों में भारत ने स्टार्टअप इकोसिस्टम, डिजिटल टेक्नोलॉजी, अंतरिक्ष कार्यक्रम, रक्षा अनुसंधान और सेमीकंडक्टर निर्माण जैसे क्षेत्रों में तेजी से प्रगति की है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ने के लिए बड़े पैमाने पर अनुसंधान निवेश जरूरी होगा। शिक्षा और विज्ञान विशेषज्ञों के अनुसार उच्च गुणवत्ता वाले रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर, वैज्ञानिक प्रतिभा विकास और नवाचार आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने से भारत की आर्थिक उत्पादकता और तकनीकी आत्मनिर्भरता मजबूत हो सकती है। नीति आयोग का यह सुझाव भारत को “इनोवेशन-ड्रिवन इकॉनमी” बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
by Dainikshamtak on | 2026-05-19 12:09:40