हैदराबाद में भारतीय स्टेट बैंक यानी SBI से जुड़े एक बड़े बैंकिंग घोटाले का मामला सामने आया है, जिसमें एक बैंक अधिकारी समेत चार लोगों पर निष्क्रिय यानी डॉर्मेंट खातों से करीब 2.65 करोड़ रुपये निकालने का आरोप लगा है। पुलिस और बैंक अधिकारियों के अनुसार आरोपियों ने लंबे समय से निष्क्रिय पड़े बैंक खातों की जानकारी का दुरुपयोग करते हुए फर्जी दस्तावेजों और अनधिकृत लेनदेन के जरिए रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किया। जांच एजेंसियों के मुताबिक इस पूरे नेटवर्क में बैंक के अंदरूनी सिस्टम की जानकारी रखने वाले लोगों की भूमिका महत्वपूर्ण रही। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी खाताधारकों की जानकारी में बदलाव कर और केवाईसी रिकॉर्ड में हेरफेर करके धनराशि निकालने में सफल रहे। मामला सामने आने के बाद बैंक ने आंतरिक जांच शुरू कर दी है और संबंधित अधिकारी को निलंबित किए जाने की संभावना जताई जा रही है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और आईटी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या इस नेटवर्क में और लोग शामिल थे तथा क्या अन्य खातों से भी इसी तरह रकम निकाली गई है। बैंकिंग विशेषज्ञों का कहना है कि डॉर्मेंट खातों की सुरक्षा और निगरानी बैंकिंग सिस्टम के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। इस घटना ने बैंकिंग क्षेत्र में साइबर और आंतरिक सुरक्षा व्यवस्थाओं पर भी सवाल खड़े किए हैं। SBI ने ग्राहकों को आश्वासन दिया है कि बैंकिंग प्रणाली को सुरक्षित बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं और प्रभावित खातों की जांच की जा रही है। यह मामला बैंकिंग सेक्टर में धोखाधड़ी के बढ़ते जोखिम और वित्तीय संस्थानों में मजबूत निगरानी तंत्र की आवश्यकता को उजागर करता है।
by Dainikshamtak on | 2026-05-09 17:23:22