बिहार सरकार ने राज्य में वाहनों पर लगाए जाने वाले जातिसूचक स्टिकर, नारे और पहचान संबंधी संदेशों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू करने का फैसला लिया है। परिवहन विभाग ने निर्देश जारी करते हुए कहा है कि सभी वाहन मालिक एक महीने के भीतर अपनी गाड़ियों से जाति आधारित स्टिकर, स्लोगन और आपत्तिजनक पहचान चिन्ह हटाएं, अन्यथा उनके खिलाफ जुर्माने की कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार नियमों का उल्लंघन करने पर वाहन मालिकों पर 2000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। राज्य सरकार का कहना है कि सार्वजनिक सड़कों पर चलने वाले वाहनों पर जाति आधारित संदेश सामाजिक सौहार्द और कानून व्यवस्था के लिए उचित नहीं माने जाते। परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया है कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत वाहन नंबर प्लेट और वाहन की बाहरी सतह पर केवल निर्धारित जानकारी ही प्रदर्शित की जा सकती है। हाल के वर्षों में बिहार समेत कई राज्यों में वाहनों पर जाति, राजनीतिक पहचान और दबदबे को दर्शाने वाले स्टिकर लगाने का चलन तेजी से बढ़ा है। सरकार का मानना है कि इससे सामाजिक तनाव और भेदभाव की भावना को बढ़ावा मिल सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए अब प्रशासन ने अभियान चलाकर ऐसे स्टिकर हटाने का फैसला किया है। पुलिस और परिवहन विभाग संयुक्त रूप से विशेष जांच अभियान भी चला सकते हैं। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे स्वेच्छा से नियमों का पालन करें और समय सीमा समाप्त होने से पहले ऐसे सभी स्टिकर हटा दें। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम सड़क सुरक्षा, सामाजिक समानता और सार्वजनिक अनुशासन बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा सकता है। बिहार सरकार की इस कार्रवाई को सोशल मीडिया पर भी व्यापक प्रतिक्रिया मिल रही है और कई लोग इसे सामाजिक सुधार की दिशा में सकारात्मक कदम बता रहे हैं।
by Dainikshamtak on | 2026-05-09 17:21:07