सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा। यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भuyan सरमा के खिलाफ खेड़ा के कथित मानहानिकारक बयानों से जुड़ा। खेड़ा ने आरोप लगाया कि रिनिकी के पास कई पासपोर्ट हैं और विदेशी संपत्ति का खुलासा निर्वाचन हलफनामे में नहीं किया। असम पुलिस ने जालसाजी, धोखाधड़ी और IPC की धारा 499 (मानहानि) के तहत FIR दर्ज की। गौहाटी हाईकोर्ट ने 24 अप्रैल को जमानत याचिका खारिज कर दी।
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में खेड़ा के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने तर्क दिया कि यह केवल मानहानि है, गिरफ्तारी जरूरी नहीं। असम सरकार ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के माध्यम से कहा कि जाली दस्तावेजों (पासपोर्ट, प्रॉपर्टी डीड) का इस्तेमाल हुआ, स्रोतों की जांच के लिए हिरासत जरूरी। कोर्ट ने टिप्पणी की कि तेलंगाना हाईकोर्ट से ट्रांजिट बेल लेना "फोरम शॉपिंग" है। 15 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना HC के आदेश पर स्टे लगा दिया था। सुनवाई में हिमंता को "संवैधानिक काउबॉय" कहा गया, पुलिस ने खेड़ा को "भगोड़ा" बताया।
गौहाटी HC ने कहा कि CM की पत्नी को राजनीतिक बयानबाजी में घसीटना गलत। जाली दस्तावेजों के स्रोत, विदेशी साजिश की जांच जरूरी। खेड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दस्तावेज दिखाए। मामला अप्रैल 2026 असम चुनाव से जुड़ा। कोर्ट ने हिरासत की जरूरत पर बहस सुनी। फैसला राजनीतिक प्रतिशोध या न्याय पर असर डालेगा। कांग्रेस ने राजनीतिक साजिश का आरोप लगाया।
by Dainikshamtak on | 2026-05-01 16:37:12