नमो भारत (दिल्ली–मेरठ RRTS): भारतीय परिवहन प्रणाली में तकनीकी क्रांति का नया अध्याय

नमो भारत (दिल्ली–मेरठ RRTS): भारतीय परिवहन प्रणाली में तकनीकी क्रांति का नया अध्याय

भारत के शहरी और क्षेत्रीय परिवहन ढांचे में वर्ष 2026 एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हुआ है। फरवरी 2026 तक दिल्ली–मेरठ क्षेत्रीय रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) का पूरा 82 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर परिचालन में आ चुका है। “नमो भारत” के नाम से संचालित यह परियोजना केवल एक तेज रफ्तार ट्रेन सेवा नहीं है, बल्कि यह आधुनिक तकनीक, उच्च स्तरीय सुरक्षा मानकों और डिजिटल एकीकरण का ऐसा मॉडल है, जिसने भारत को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाई है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में बढ़ते ट्रैफिक दबाव, प्रदूषण और लंबी यात्रा अवधि की समस्या के बीच यह परियोजना एक ठोस और दीर्घकालिक समाधान के रूप में सामने आई है।दिल्ली से मेरठ के बीच लगभग 82 किलोमीटर की दूरी को अब केवल 55 से 60 मिनट में तय किया जा सकता है, जबकि पहले सड़क मार्ग से यही यात्रा दो घंटे या उससे अधिक समय लेती थी। यह समय की बचत केवल सुविधा का प्रश्न नहीं है, बल्कि उत्पादकता, आर्थिक गतिविधियों और जीवन की गुणवत्ता से भी जुड़ा हुआ है। हजारों दैनिक यात्री, जो काम या शिक्षा के लिए दिल्ली और मेरठ के बीच आवाजाही करते हैं, उनके लिए यह सेवा एक बड़ा परिवर्तन लेकर आई है।इस परियोजना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसकी उन्नत सिग्नलिंग तकनीक है। नमो भारत कॉरिडोर में यूरोपियन ट्रेन कंट्रोल सिस्टम (ETCS) लेवल-2 का उपयोग किया गया है, जिसे समर्पित LTE यानी 4G नेटवर्क के माध्यम से संचालित किया जा रहा है। यह दुनिया का पहला ऐसा उदाहरण है, जहां इस स्तर की सिग्नलिंग को 4G नेटवर्क के साथ लागू किया गया है। पारंपरिक सिग्नलिंग प्रणालियां जैसे GSM-R अब पुरानी मानी जा रही हैं, जबकि LTE आधारित प्रणाली अधिक तेज डेटा ट्रांसफर, कम विलंबता (लो लेटेंसी) और रीयल-टाइम संचार की सुविधा देती है। इसका सीधा अर्थ है कि ट्रेन और नियंत्रण कक्ष के बीच लगातार और सटीक संपर्क बना रहता है, जिससे संचालन अधिक सुरक्षित और प्रभावी होता है।इस अत्याधुनिक तकनीक का एक बड़ा लाभ इंटरऑपरेबिलिटी है। भविष्य में जब अलवर या पानीपत जैसे अन्य RRTS कॉरिडोर विकसित होंगे, तो उनकी ट्रेनें बिना किसी बड़े हार्डवेयर बदलाव के इस दिल्ली–मेरठ मार्ग पर संचालित की जा सकेंगी। यह एकीकृत क्षेत्रीय परिवहन नेटवर्क की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, जिससे पूरे NCR में सुगम और निर्बाध कनेक्टिविटी सुनिश्चित की जा सकेगी।सुरक्षा और क्षमता के दृष्टिकोण से भी यह परियोजना विशेष महत्व रखती है। पारंपरिक मेट्रो प्रणालियां “फिक्स्ड ब्लॉक” प्रणाली पर आधारित होती हैं, जिसमें ट्रैक को अदृश्य खंडों में बांट दिया जाता है और एक समय में केवल एक ट्रेन ही एक खंड में प्रवेश कर सकती है। इसके विपरीत, नमो भारत में “मूविंग ब्लॉक” प्रणाली अपनाई गई है। इस प्रणाली में प्रत्येक ट्रेन के चारों ओर एक गतिशील सुरक्षा क्षेत्र या “डायनामिक सेफ्टी एनवेलप” बनाया जाता है, जो उसकी गति और ब्रेकिंग दूरी के अनुसार वास्तविक समय में बदलता रहता है। चूंकि नियंत्रण प्रणाली को हर ट्रेन की सटीक स्थिति, गति और दूरी की जानकारी होती है, इसलिए ट्रेनों के बीच सुरक्षित दूरी को कम किया जा सकता है। परिणामस्वरूप 160 किलोमीटर प्रति घंटा की परिचालन गति पर भी केवल तीन मिनट के अंतराल पर ट्रेनें चलाई जा सकती हैं। यह उच्च आवृत्ति यात्री क्षमता को बढ़ाती है और भीड़ को नियंत्रित करने में मदद करती है।तकनीकी दृष्टि से यह कॉरिडोर कई उन्नत मानकों पर खरा उतरता है। इसकी डिजाइन गति 180 किलोमीटर प्रति घंटा है, जबकि परिचालन गति 160 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है। 25 केवी एसी विद्युत आपूर्ति प्रणाली का उपयोग किया गया है, जिसमें फ्लेक्सिबल और रigid ओवरहेड इक्विपमेंट (OHE) दोनों शामिल हैं। सुरक्षा के लिए प्लेटफॉर्म स्क्रीन डोर्स लगाए गए हैं, जो ट्रेन के दरवाजों के साथ समन्वयित होकर खुलते और बंद होते हैं। इससे दुर्घटनाओं की संभावना कम होती है और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है।मेरठ शहर के भीतर इस परियोजना की एक और अनूठी विशेषता देखने को मिलती है। यहां मेरठ मेट्रो और नमो भारत RRTS एक ही ट्रैक का उपयोग करते हैं। यह इंफ्रास्ट्रक्चर साझा करने का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जहां अलग-अलग गति की ट्रेनें एक ही मार्ग पर स्मार्ट सिग्नलिंग प्रणाली की मदद से सुचारु रूप से संचालित होती हैं। इससे लागत में कमी आती है और शहरी परिवहन ढांचे का बेहतर उपयोग संभव होता है।आर्थिक और पर्यावरणीय दृष्टिकोण से भी यह परियोजना महत्वपूर्ण है। तेज और विश्वसनीय सार्वजनिक परिवहन प्रणाली निजी वाहनों पर निर्भरता को कम करती है, जिससे ईंधन की खपत और वायु प्रदूषण में कमी आती है। NCR जैसे अत्यधिक प्रदूषित क्षेत्र में यह एक सकारात्मक कदम है। इसके साथ ही बेहतर कनेक्टिविटी से क्षेत्रीय विकास को गति मिलती है। मेरठ जैसे शहरों में रियल एस्टेट, व्यापार और रोजगार के अवसरों में वृद्धि की संभावना बढ़ती है।इस परियोजना की एक और विशेष उपलब्धि इसका “मेड इन इंडिया” स्वरूप है। नमो भारत के ट्रेनसेट्स का डिजाइन हैदराबाद में तैयार किया गया और उनका निर्माण गुजरात के सावली में किया गया। यह दर्शाता है कि भारत न केवल उन्नत तकनीक का उपभोक्ता है, बल्कि उसे विकसित और लागू करने में भी सक्षम है। आत्मनिर्भर भारत की दिशा में यह एक सशक्त उदाहरण है।समग्र रूप से देखा जाए तो दिल्ली–मेरठ नमो भारत RRTS केवल एक परिवहन परियोजना नहीं, बल्कि एक तकनीकी और संरचनात्मक परिवर्तन का प्रतीक है। यह परियोजना दर्शाती है कि जब दूरदर्शी योजना, आधुनिक तकनीक और प्रभावी क्रियान्वयन एक साथ आते हैं, तो किस प्रकार शहरी और क्षेत्रीय परिवहन प्रणाली को नई दिशा दी जा सकती है। आने वाले वर्षों में यदि इसी मॉडल को अन्य कॉरिडोरों पर लागू किया जाता है, तो भारत का परिवहन परिदृश्य निस्संदेह वैश्विक मानकों के अनुरूप और अधिक सशक्त बन सकेगा। नमो भारत वास्तव में एक ऐसे भविष्य की ओर संकेत करता है, जहां तेज, सुरक्षित और स्मार्ट परिवहन हर नागरिक की पहुंच में होगा।

by Dainikshamtak on | 2026-02-26 18:41:03

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