तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) ने बलोचिस्तान की राजधानी क्वेटा स्थित फ्रंटियर कॉर्प्स (एफसी) मुख्यालय पर हुए आत्मघाती हमले की जिम्मेदारी ली है। टीटीपी ने अपने मीडिया प्रकोष्ठ उमर मीडिया के माध्यम से बयान जारी कर कहा कि यह हमला उनके अल-फारूक ब्रिगेड ने अंजाम दिया जिसमें छह हमलावर शामिल थे। संगठन ने बताया कि एक तथाकथित आत्मघाती हमलावर ने विस्फोटकों से भरी गाड़ी को एफसी मुख्यालय परिसर में घुसाया और बाकी पांच बंदूकधारी व विस्फोटक लेकर वहां घुस गए। यह हमला लगभग दो घंटे तक चला जिससे क्वेटा में आतंक और अफरातफरी का माहौल बन गया। टीटीपी ने दावा किया कि उनके ऑपरेशन 'गज़वा क्वेटा' में 350 किलोग्राम विस्फोटक का इस्तेमाल किया गया और 40 सुरक्षाकर्मियों की मौत हुई है, जबकि पाकिस्तानी अधिकारियों ने 10 लोगों के मरने और 30 घायल होने की पुष्टि की है जिनमें नागरिक भी शामिल हैं। टीटीपी ने हमले की वजह पाकिस्तान सुरक्षा बलों द्वारा कथित नकली पुलिस मुठभेड़ों में उनके कैदियों को मौत के घाट उतारना बताया है और बचाव में इस आत्मघाती हमले को उचित ठहराया। उसके मुताबिक, पाकिस्तानी सेना ने हाल ही में बलोचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में ड्रोन हमले किए थे जिसमें कथित तौर पर नागरिकों को निशाना बनाया गया। हमले के बाद पाकिस्तानी कॉन्टर टेररिज्म विभाग (सीटीडी) ने शेरानी और क्वेटा में टीटीपी के 18 लड़ाकों के मारे जाने का दावा किया मगर टीटीपी प्रवक्ता ने उसे झूठा बताया और कहा कि मारे गए लोग पहले से ही सेना की हिरासत में थे। इस हमले की समयबद्धता पर विश्लेषकों का कहना है कि यह पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज़ शरीफ की अमेरिका यात्रा और उनकी सुरक्षा छवि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चुनौती देने के मकसद से भी हो सकता है। क्वेटा के इस आत्मघाती हमले ने पाकिस्तान के सुरक्षा तंत्र को हिला दिया है और क्षेत्रीय अशांति की चुनौती को उजागर किया है। घटना के तुरंत बाद पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और प्रांतीय मुख्यमंत्री तथा कई देशों की दूतावासों ने हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है।
by Dainikshamtak on | 2025-10-03 13:49:33