भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंथा नागेश्वरन ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े शेयरों और उनकी ऊंची वैल्यूएशन को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि एआई क्षेत्र में निवेशकों की अपेक्षाएं और कई कंपनियों का बाजार मूल्यांकन एक संभावित बुलबुले जैसी स्थिति को दर्शा सकता है। उन्होंने कहा कि एआई को लेकर सबसे आशावादी आर्थिक अनुमान इस धारणा पर आधारित हैं कि भविष्य में होने वाले लाभ का बड़ा हिस्सा श्रमिकों के बजाय पूंजी के मालिकों को प्राप्त होगा। नागेश्वरन के अनुसार यदि किसी कंपनी में कर्मचारियों की संख्या शून्य हो और अधिकांश कार्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रणालियों द्वारा किए जाएं, तो उस स्थिति में उत्पन्न होने वाला लगभग पूरा लाभ पूंजी के मालिकों के पास जाएगा। उन्होंने कहा कि एआई से जुड़ी कई चर्चाओं और बाजार में दिखाई देने वाले उत्साह के पीछे इसी प्रकार की आर्थिक तस्वीर प्रस्तुत की जा रही है। उनकी टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब वैश्विक स्तर पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता कंपनियों, चिप निर्माताओं और एआई अवसंरचना से जुड़ी फर्मों के शेयरों में उल्लेखनीय तेजी देखी गई है। निवेशकों का मानना है कि एआई आने वाले वर्षों में उत्पादकता, नवाचार और आर्थिक विकास को नई दिशा दे सकता है। हालांकि कुछ अर्थशास्त्री और बाजार विशेषज्ञ यह भी चेतावनी देते रहे हैं कि अत्यधिक आशावादी अपेक्षाएं कई बार परिसंपत्ति मूल्यों को वास्तविक आर्थिक आधार से अधिक ऊपर ले जा सकती हैं। नागेश्वरन की टिप्पणी ने एआई क्रांति के आर्थिक प्रभावों, रोजगार बाजार पर संभावित असर और आय वितरण से जुड़े प्रश्नों को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रसार से उत्पादकता में वृद्धि की संभावना है, लेकिन इसके लाभ समाज के विभिन्न वर्गों तक किस प्रकार पहुंचेंगे, यह भविष्य की नीतियों और आर्थिक संरचना पर निर्भर करेगा। भारत सहित दुनिया भर की सरकारें एआई के अवसरों और चुनौतियों दोनों पर ध्यान दे रही हैं। ऐसे में मुख्य आर्थिक सलाहकार का यह बयान केवल शेयर बाजार मूल्यांकन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भविष्य की अर्थव्यवस्था में पूंजी, श्रम और प्रौद्योगिकी के संबंधों पर व्यापक बहस को भी रेखांकित करता है।
by Dainikshamtak on | 2026-06-15 22:45:14