493 अरब डॉलर उत्पादन के साथ भारत बना दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी विनिर्माण शक्ति

493 अरब डॉलर उत्पादन के साथ भारत बना दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी विनिर्माण शक्ति

भारत ने वैश्विक विनिर्माण क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी विनिर्माण अर्थव्यवस्था के रूप में अपनी स्थिति मजबूत की है। नवीनतम उद्योग आंकड़ों के अनुसार, देश का विनिर्माण उत्पादन लगभग 493 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। इस उपलब्धि के साथ भारत अब केवल चीन, अमेरिका, जापान और जर्मनी से पीछे है, जबकि उसने कई विकसित अर्थव्यवस्थाओं को पीछे छोड़ दिया है।

पिछले एक दशक में भारत के विनिर्माण क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2015 में जहां विनिर्माण उत्पादन लगभग 328 अरब डॉलर था, वहीं हाल के वर्षों में इसमें तेज़ विस्तार देखने को मिला है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस वृद्धि के पीछे औद्योगिक निवेश, बुनियादी ढांचे के विकास, उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं और ‘मेक इन इंडिया’ जैसी पहलों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए कई नीतिगत कदम उठाए हैं। उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजनाओं के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स, ऑटोमोबाइल, बैटरी, सौर उपकरण और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहित किया गया है। इन पहलों का उद्देश्य भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं का महत्वपूर्ण केंद्र बनाना है।

इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र भारत के सबसे तेज़ी से बढ़ते विनिर्माण क्षेत्रों में शामिल है। स्मार्टफोन उत्पादन में भारत ने उल्लेखनीय प्रगति की है और कई वैश्विक कंपनियों ने देश में अपनी उत्पादन क्षमता का विस्तार किया है। इसके अलावा ऑटोमोबाइल उद्योग, विशेष रूप से इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र, और फार्मास्यूटिकल उद्योग भी विनिर्माण वृद्धि के प्रमुख चालक बने हुए हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में बदलाव ने भी भारत को लाभ पहुंचाया है। कई बहुराष्ट्रीय कंपनियां उत्पादन केंद्रों में विविधता लाने की रणनीति अपना रही हैं और भारत को एक महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में देख रही हैं। देश की बड़ी घरेलू बाजार क्षमता, कुशल कार्यबल और नीतिगत सुधारों ने निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया है।

वर्तमान में विनिर्माण क्षेत्र भारत की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लगभग 13 प्रतिशत का योगदान देता है। सरकार और उद्योग जगत का लक्ष्य आने वाले वर्षों में इस हिस्सेदारी को और बढ़ाना है। इसके लिए औद्योगिक गलियारों, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क, बंदरगाहों और परिवहन अवसंरचना में निवेश जारी है।

विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि वर्तमान वृद्धि दर बनी रहती है, तो आने वाले वर्षों में भारत का विनिर्माण उत्पादन लगभग 781 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। इससे रोजगार सृजन, निर्यात वृद्धि और आर्थिक विकास को अतिरिक्त गति मिलने की संभावना है। विनिर्माण क्षेत्र को भारत के दीर्घकालिक आर्थिक परिवर्तन का महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है।

भारत की यह उपलब्धि इस धारणा में भी बदलाव का संकेत देती है कि देश केवल सेवा क्षेत्र आधारित अर्थव्यवस्था है। स्मार्टफोन, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, दवाओं और उन्नत औद्योगिक उत्पादों के निर्माण में बढ़ती क्षमता के साथ भारत वैश्विक विनिर्माण परिदृश्य में अपनी भूमिका लगातार मजबूत कर रहा है।

by Dainikshamtak on | 2026-06-15 00:41:52

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