कलपक्कम PFBR उपलब्धि को IAEA ने बताया सुरक्षित और महत्वपूर्ण प्रगति

कलपक्कम PFBR उपलब्धि को IAEA ने बताया सुरक्षित और महत्वपूर्ण प्रगति

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के महानिदेशक राफेल ग्रोसी ने तमिलनाडु के कलपक्कम स्थित भारत के प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) की उपलब्धि की सराहना करते हुए इसे सुरक्षित और एक सुविचारित राष्ट्रीय परमाणु कार्यक्रम की तार्किक प्रगति बताया है। उनकी टिप्पणी भारत द्वारा इस उन्नत परमाणु रिएक्टर के सफलतापूर्वक क्रिटिकलिटी हासिल करने के बाद सामने आई, जिसे देश के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।

प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ने 6 अप्रैल 2026 को पहली बार क्रिटिकलिटी प्राप्त की थी। परमाणु विज्ञान की भाषा में क्रिटिकलिटी वह अवस्था होती है जब रिएक्टर के भीतर नियंत्रित और आत्मनिर्भर परमाणु श्रृंखला अभिक्रिया शुरू हो जाती है। यह किसी भी परमाणु रिएक्टर के संचालन की दिशा में एक महत्वपूर्ण तकनीकी चरण माना जाता है।

500 मेगावाट विद्युत क्षमता वाला यह रिएक्टर भारतीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के दूसरे चरण का प्रमुख हिस्सा है। इसका निर्माण भारतीय परमाणु विद्युत निगम (BHAVINI) द्वारा किया गया है और इसे पूरी तरह स्वदेशी डिजाइन एवं तकनीकी क्षमता के आधार पर विकसित किया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह परियोजना भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा रणनीति में केंद्रीय भूमिका निभा सकती है।

फास्ट ब्रीडर रिएक्टर की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यह जितना परमाणु ईंधन उपयोग करता है, उससे अधिक विखंडनीय ईंधन उत्पन्न करने की क्षमता रखता है। इसी कारण इसे “ब्रीडर” रिएक्टर कहा जाता है। यह तकनीक भारत की तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसे परमाणु वैज्ञानिक होमी जहांगीर भाभा ने परिकल्पित किया था।

भारत के पास विश्व के सबसे बड़े थोरियम भंडारों में से एक है। PFBR को भविष्य में थोरियम आधारित ऊर्जा कार्यक्रम की दिशा में एक महत्वपूर्ण सेतु माना जाता है। इस तकनीक के माध्यम से भारत अपने घरेलू संसाधनों का उपयोग कर दीर्घकालिक ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ सकता है।

IAEA प्रमुख की टिप्पणी को वैश्विक परमाणु समुदाय की ओर से भारत की तकनीकी क्षमता की मान्यता के रूप में देखा जा रहा है। परमाणु क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि बहुत कम देशों के पास फास्ट ब्रीडर रिएक्टर तकनीक विकसित करने और संचालित करने की क्षमता है, जिससे यह उपलब्धि और अधिक महत्वपूर्ण बन जाती है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी PFBR की क्रिटिकलिटी को भारत की वैज्ञानिक और इंजीनियरिंग क्षमता का प्रतीक बताते हुए इसे देश की परमाणु यात्रा में एक निर्णायक कदम कहा था। सरकार का मानना है कि यह उपलब्धि स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन, ऊर्जा सुरक्षा और तकनीकी आत्मनिर्भरता को मजबूत करने में योगदान देगी।

विश्लेषकों के अनुसार, कलपक्कम में PFBR की सफलता केवल एक तकनीकी उपलब्धि नहीं है, बल्कि भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति, परमाणु अनुसंधान क्षमता और उन्नत प्रौद्योगिकी विकास के लिए भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। IAEA की सकारात्मक प्रतिक्रिया ने इस उपलब्धि के अंतरराष्ट्रीय महत्व को और रेखांकित किया है।

by Dainikshamtak on | 2026-06-15 00:35:38

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