Reserve Bank of India (RBI) के अनुसार 15 मई को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) 8 अरब डॉलर घटकर 688.894 अरब डॉलर रह गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह गिरावट मुख्य रूप से विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों (Foreign Currency Assets) और वैश्विक वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव से जुड़ी मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश की आर्थिक स्थिरता, आयात क्षमता और मुद्रा प्रबंधन के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है।
आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार भारत दुनिया के सबसे बड़े विदेशी मुद्रा भंडार रखने वाले देशों में शामिल है। यह भंडार भारतीय रुपये की स्थिरता बनाए रखने, बाहरी आर्थिक झटकों से सुरक्षा प्रदान करने और अंतरराष्ट्रीय व्यापार भुगतान को समर्थन देने में अहम भूमिका निभाता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक हाल के महीनों में वैश्विक तेल कीमतों, डॉलर इंडेक्स में मजबूती और भू-राजनीतिक तनावों के कारण कई देशों की मुद्राओं और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव देखा गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि RBI समय-समय पर रुपये की अत्यधिक अस्थिरता को नियंत्रित करने के लिए विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करता है, जिसका असर रिजर्व स्तर पर भी पड़ सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार भारत का विदेशी मुद्रा भंडार अभी भी ऐतिहासिक रूप से मजबूत स्तर पर बना हुआ है और यह कई महीनों के आयात खर्च को कवर करने में सक्षम माना जाता है।
आर्थिक विशेषज्ञों के मुताबिक मजबूत फॉरेक्स रिजर्व निवेशकों के विश्वास, क्रेडिट रेटिंग और वित्तीय स्थिरता के लिए सकारात्मक संकेत माना जाता है। हालांकि लगातार बढ़ते आयात बिल, तेल कीमतों में उछाल और वैश्विक वित्तीय अनिश्चितता भविष्य में दबाव बढ़ा सकती है।
हाल के वर्षों में भारत ने विदेशी निवेश, निर्यात वृद्धि और सेवा क्षेत्र की आय के जरिए अपने विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत किया है। रिपोर्ट्स के अनुसार RBI और केंद्र सरकार दोनों बाहरी आर्थिक जोखिमों से निपटने के लिए वित्तीय स्थिरता बनाए रखने पर लगातार ध्यान दे रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत की विदेशी मुद्रा स्थिति वैश्विक स्तर पर अपेक्षाकृत मजबूत बनी हुई है।
by Dainikshamtak on | 2026-05-23 15:35:38