भारत ने कथित तौर पर अपनी अगली पीढ़ी की K-5 SLBM प्रणाली से जुड़े अंडरवॉटर लॉन्च मैकेनिज्म का सफल परीक्षण किया है। रिपोर्टों के अनुसार, मार्च 2026 में किए गए इस “पॉप-अप” या इजेक्शन परीक्षण में पानी के भीतर से मिसाइल को सुरक्षित तरीके से बाहर निकालने वाली प्रणाली को परखा गया। जानकारी रक्षा मामलों के पत्रकार Sandeep Unnithan द्वारा साझा की गई रिपोर्टों के बाद सामने आई है। हालांकि सरकार की ओर से परीक्षण पर विस्तृत आधिकारिक पुष्टि सार्वजनिक रूप से जारी नहीं की गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, “पॉप-अप” परीक्षण किसी भी Submarine-Launched Ballistic Missile प्रणाली के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस प्रक्रिया में मिसाइल को पनडुब्बी या अंडरवॉटर प्लेटफॉर्म से गैस प्रेशर या इजेक्शन सिस्टम के जरिए पानी की सतह तक सुरक्षित रूप से बाहर निकाला जाता है, जिसके बाद इंजन सक्रिय होता है। यह तकनीक समुद्र आधारित परमाणु प्रतिरोधक क्षमता का प्रमुख हिस्सा मानी जाती है।
रिपोर्टों के मुताबिक, K-5 SLBM की अनुमानित मारक क्षमता लगभग 5,000 से 6,000 किलोमीटर तक हो सकती है। इसे मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टार्गेटेबल री-एंट्री व्हीकल्स (MIRV) क्षमता के साथ विकसित किए जाने की भी चर्चा है, जिससे एक ही मिसाइल कई लक्ष्यों को भेदने में सक्षम हो सकती है।
विश्लेषकों का कहना है कि यह प्रणाली भविष्य की S-5 class submarine परमाणु बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियों के लिए विकसित की जा रही है। भारत लंबे समय से अपनी समुद्र आधारित परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने पर काम कर रहा है, क्योंकि इसे परमाणु त्रिस्तरीय प्रतिरोधक ढांचे का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
Defence Research and Development Organisation द्वारा विकसित की जा रही K-5 SLBM को भारत की अब तक की सबसे बड़ी और भारी SLBM परियोजनाओं में शामिल माना जा रहा है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, लंबी दूरी की समुद्र आधारित मिसाइलें रणनीतिक प्रतिरोधक क्षमता और दूसरे जवाबी हमले की क्षमता को मजबूत करती हैं।
हालांकि रक्षा विश्लेषकों का यह भी कहना है कि ऐसी परियोजनाओं में तकनीकी विश्वसनीयता, पनडुब्बी एकीकरण, गाइडेंस सिस्टम और परीक्षण चरण बेहद जटिल होते हैं। किसी भी नई रणनीतिक मिसाइल प्रणाली को पूर्ण परिचालन क्षमता तक पहुंचने में कई वर्षों का विकास और परीक्षण लग सकता है।
भारत हाल के वर्षों में मिसाइल, पनडुब्बी और रणनीतिक रक्षा प्रणालियों के स्वदेशी विकास पर लगातार जोर दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि K-5 SLBM से जुड़ा सफल परीक्षण देश की दीर्घ दूरी की समुद्र आधारित प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति माना जा सकता है।
by Dainikshamtak on | 2026-05-13 18:18:33