सुप्रीम कोर्ट ने भारत में अनिवार्य मतदान व्यवस्था पर तंत्र बनाने को कहा

सुप्रीम कोर्ट ने भारत में अनिवार्य मतदान व्यवस्था पर तंत्र बनाने को कहा

सुप्रीम कोर्ट ने भारत में मतदान को अनिवार्य बनाने के लिए एक उपयुक्त तंत्र विकसित करने की आवश्यकता पर टिप्पणी की है। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में व्यापक मतदाता भागीदारी सुनिश्चित करने के उपायों पर विचार किया जाना चाहिए। अदालत ने संकेत दिया कि यदि मतदान को अनिवार्य बनाने का प्रस्ताव सामने आता है तो इसके लिए स्पष्ट कानूनी और प्रशासनिक ढांचा तैयार करना आवश्यक होगा। वर्तमान में भारत में मतदान नागरिक का अधिकार है, न कि कानूनी रूप से बाध्यकारी कर्तव्य। न्यायालय की टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब मतदाता उपस्थिति और चुनावी सुधारों को लेकर सार्वजनिक विमर्श जारी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अनिवार्य मतदान लागू करने के लिए विधायी संशोधन, दंडात्मक या प्रोत्साहन आधारित प्रावधान और व्यापक प्रशासनिक तैयारी की जरूरत होगी। कुछ देशों में अनिवार्य मतदान की व्यवस्था लागू है, जहां अनुपस्थित रहने पर दंड या अन्य उपाय निर्धारित हैं। भारत में किसी भी ऐसे कदम के लिए संसद द्वारा कानून पारित करना आवश्यक होगा। अदालत ने इस विषय पर संबंधित पक्षों से विचार प्रस्तुत करने को कहा और व्यापक परामर्श की आवश्यकता पर बल दिया। चुनाव आयोग और विधि विशेषज्ञों की भूमिका इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण मानी जाएगी। न्यायालय की टिप्पणी को चुनावी सुधारों पर चर्चा के संदर्भ में देखा जा रहा है, हालांकि अंतिम निर्णय विधायी प्रक्रिया के माध्यम से ही संभव होगा।

by Dainikshamtak on | 2026-02-25 17:51:34

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