आंध्र प्रदेश में ₹30,000 करोड़ के मेगा शिपबिल्डिंग क्लस्टर को मिली सैद्धांतिक मंजूरी

आंध्र प्रदेश में ₹30,000 करोड़ के मेगा शिपबिल्डिंग क्लस्टर को मिली सैद्धांतिक मंजूरी

भारत सरकार ने आंध्र प्रदेश के दुगराजापटनम में लगभग 30,000 करोड़ रुपये के प्रस्तावित मेगा शिपबिल्डिंग क्लस्टर को सिद्धांततः मंजूरी दी है। इस परियोजना को भारत की समुद्री विनिर्माण क्षमता, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और दीर्घकालिक समुद्री रणनीति के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

रिपोर्टों के अनुसार, यह परियोजना लगभग 2,000 एकड़ क्षेत्र में विकसित की जा सकती है और इसकी वार्षिक क्षमता लगभग 1.2 मिलियन ग्रॉस टन तक होने का अनुमान है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि परियोजना नियोजित स्तर पर विकसित होती है, तो यह भारत की घरेलू जहाज निर्माण क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकती है।

विश्लेषकों का कहना है कि भारत लंबे समय से वैश्विक जहाज निर्माण उद्योग में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। वर्तमान में चीन, दक्षिण कोरिया और जापान जैसे देश इस क्षेत्र में प्रमुख भूमिका निभाते हैं। भारत अपने विशाल समुद्री तट, बढ़ते व्यापार और रणनीतिक स्थिति के कारण इस क्षेत्र में दीर्घकालिक अवसर देख रहा है।

रिपोर्टों के अनुसार, यह परियोजना Maritime India Vision 2047 का हिस्सा मानी जा रही है। इस रणनीति का उद्देश्य घरेलू जहाज निर्माण, बंदरगाह अवसंरचना, समुद्री लॉजिस्टिक्स और वैश्विक समुद्री व्यापार में भारत की भूमिका को मजबूत करना है।

विशेषज्ञों के अनुसार, भारत लगभग 437 नए भारतीय ध्वज वाले जहाजों के निर्माण और समुद्री परिवहन क्षमता विस्तार की दिशा में भी काम कर रहा है। समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए विदेशी जहाजों पर अत्यधिक निर्भरता को रणनीतिक जोखिम के रूप में भी देखा जाता है।

आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि बड़े शिपबिल्डिंग क्लस्टर केवल जहाज निर्माण तक सीमित नहीं होते। इनके साथ भारी इंजीनियरिंग, स्टील, इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा निर्माण, लॉजिस्टिक्स और रोजगार सृजन जैसे कई उद्योग भी जुड़े होते हैं।

हालांकि विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि वैश्विक जहाज निर्माण उद्योग अत्यधिक प्रतिस्पर्धी और पूंजी-गहन क्षेत्र है। लागत प्रतिस्पर्धा, तकनीकी क्षमता, वित्तपोषण और निर्यात बाजारों तक पहुंच इस क्षेत्र की सफलता के लिए महत्वपूर्ण होंगे।

Andhra Pradesh लंबे समुद्री तट और बंदरगाह नेटवर्क के कारण भारत की समुद्री अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। विश्लेषकों के अनुसार, दुगराजापटनम परियोजना राज्य की औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स क्षमता को भी बढ़ा सकती है।

फिलहाल प्रस्तावित मेगा शिपबिल्डिंग क्लस्टर को भारत की समुद्री आत्मनिर्भरता, औद्योगिक विस्तार और दीर्घकालिक आर्थिक सुरक्षा रणनीति के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।

by Dainikshamtak on | 2026-05-21 17:26:34

Related Post