संसदीय समिति ने देश में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के उपयोग को अधिक सुरक्षित और जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से सोशल मीडिया, डेटिंग और ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म्स पर अनिवार्य केवाईसी आधारित सत्यापन लागू करने की सिफारिश की है। समिति का मानना है कि इस कदम से फर्जी खातों, ऑनलाइन धोखाधड़ी और साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा। रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान समय में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर उपयोगकर्ताओं की पहचान सत्यापित न होने के कारण कई प्रकार की समस्याएं सामने आती हैं, जिनमें गलत जानकारी का प्रसार, फेक प्रोफाइल और वित्तीय धोखाधड़ी शामिल हैं। समिति ने सुझाव दिया है कि केवाईसी प्रक्रिया के माध्यम से प्रत्येक उपयोगकर्ता की पहचान सुनिश्चित की जाए, जिससे प्लेटफॉर्म्स पर पारदर्शिता और सुरक्षा को बढ़ावा मिल सके। हालांकि इस प्रस्ताव के साथ डेटा गोपनीयता और उपयोगकर्ताओं की निजता से जुड़े मुद्दे भी सामने आ सकते हैं, जिन पर संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता बताई जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि जहां एक ओर केवाईसी से सुरक्षा में सुधार हो सकता है, वहीं दूसरी ओर यह सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा कि उपयोगकर्ताओं की व्यक्तिगत जानकारी सुरक्षित रहे और उसका दुरुपयोग न हो। सरकार पहले ही डिजिटल सुरक्षा और डेटा संरक्षण को लेकर विभिन्न नीतियों पर काम कर रही है और यह सिफारिश उसी दिशा में एक और कदम मानी जा रही है। इस प्रस्ताव को लागू करने के लिए कानूनी और तकनीकी ढांचे में बदलाव की आवश्यकता हो सकती है, जिसमें विभिन्न हितधारकों की भागीदारी अहम होगी। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस सिफारिश पर क्या निर्णय लेती है और इसे लागू करने के लिए किस प्रकार की नीति तैयार की जाती है, क्योंकि इसका असर करोड़ों डिजिटल उपयोगकर्ताओं पर पड़ सकता है।
by Dainikshamtak on | 2026-03-27 15:18:31