विनिमय दरों में सरकार हस्तक्षेप नहीं करती, बाजार और वैश्विक कारक तय करते हैं कीमतें: पीयूष गोयल

विनिमय दरों में सरकार हस्तक्षेप नहीं करती, बाजार और वैश्विक कारक तय करते हैं कीमतें: पीयूष गोयल

 केंद्रीय मंत्री Piyush Goyal ने कहा है कि सरकार सीधे तौर पर विनिमय दरों (Exchange Rates) में हस्तक्षेप नहीं करती क्योंकि ये बाजार की शक्तियों और कई वैश्विक कारकों से तय होती हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने स्पष्ट किया कि मुद्रा विनिमय दरों पर अंतरराष्ट्रीय आर्थिक परिस्थितियों, डॉलर की मजबूती, कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक निवेश प्रवाह और भू-राजनीतिक घटनाओं का बड़ा प्रभाव पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकांश आधुनिक अर्थव्यवस्थाओं में मुद्रा विनिमय दरें बाजार आधारित प्रणाली के तहत निर्धारित होती हैं।

आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार भारतीय रुपया हाल के समय में वैश्विक आर्थिक दबावों, तेल कीमतों और डॉलर इंडेक्स में मजबूती के कारण उतार-चढ़ाव का सामना कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका की ब्याज दर नीतियां, पश्चिम एशिया संकट और वैश्विक व्यापार अनिश्चितता जैसी परिस्थितियां भी मुद्रा बाजारों को प्रभावित कर रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आयात-निर्यात संतुलन, विदेशी निवेश और विदेशी मुद्रा भंडार भी विनिमय दरों पर असर डालते हैं।

हालांकि सरकार प्रत्यक्ष रूप से दरें तय नहीं करती, लेकिन Reserve Bank of India (RBI) जरूरत पड़ने पर अत्यधिक अस्थिरता को नियंत्रित करने के लिए विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप कर सकता है। आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि केंद्रीय बैंक का मुख्य उद्देश्य बाजार में स्थिरता बनाए रखना होता है, न कि किसी निश्चित विनिमय दर को बनाए रखना।

रिपोर्ट्स के अनुसार हाल के महीनों में रुपये पर दबाव बढ़ने के बावजूद भारत का विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत स्तर पर बना हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि मजबूत आर्थिक वृद्धि, सेवा निर्यात और निवेश प्रवाह भारतीय अर्थव्यवस्था को समर्थन प्रदान कर रहे हैं।

विश्लेषकों के अनुसार कमजोर रुपया निर्यात को प्रतिस्पर्धी बना सकता है, लेकिन इससे आयात विशेषकर कच्चे तेल की लागत बढ़ सकती है। इसलिए मुद्रा स्थिरता भारत जैसी बड़ी आयात-निर्भर अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।

पीयूष गोयल का यह बयान ऐसे समय आया है जब वैश्विक मुद्रा बाजारों में अस्थिरता और भू-राजनीतिक तनाव बढ़े हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में भी वैश्विक आर्थिक कारक भारतीय रुपये की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

by Dainikshamtak on | 2026-05-24 19:19:16

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